हाए ए सिविल अस्पताल : कमरे में लटका दीं मच्छरदानियां, नाम डेंगू वार्ड!

इंसान को दिन-रात बेचैन करने वाले डेंगू मच्छर ने सबकी नाक में दम कर दिया है।

JagranFri, 17 Sep 2021 06:00 AM (IST)
हाए ए सिविल अस्पताल : कमरे में लटका दीं मच्छरदानियां, नाम डेंगू वार्ड!

नितिन धीमान, अमृतसर: इंसान को दिन-रात बेचैन करने वाले डेंगू मच्छर ने सबकी नाक में दम कर दिया है। जिले में 294 डेंगू संक्रमित रिपोर्ट हो चुके हैं। डेंगू संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य विभाग की गहरी नींद टूटी नहीं। जिले के सिविल अस्पताल में डेंगू मरीजों के उपचार के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। यहां बनाए डेंगू वार्ड में सिर्फ मच्छरदानियों में मरीजों को रखकर उपचार की खानापूर्ति हो रही है। मच्छरदानी लगाकर एक कमरे को डेंगू वार्ड का नाम दिया गया है।

सिविल अस्पताल में इस समय 15 डेंगू संक्रमित उपचाराधीन हैं। हाल ही में तीन मरीजों को प्लेट्लेटस की जरूरत पड़ी तो अस्पताल प्रशासन ने गुरुनानक देव अस्पताल स्थित ब्लड बैंक से प्लेट्लेट्स के पैकेट मंगवाकर इन्हें चढ़ाए। असल में सिविल अस्पताल में 2009 में एफ्रेसिस मशीन इंस्टाल की गई थी। इस मशीन से मरीजों से रक्तदाता के रक्त से प्लेट्लेट्स निकालकर डेंगू संक्रमित को चढ़ाए जाते थे। प्लेट्लेट्स अलग करने वाली यह मशीन खराब है। ऐसे में गुरुनानक देव अस्पताल से प्लेट्लेट्स मंगवाए जा रहे हैं। वहीं वेंटिलेटर्स की सुविधा सिविल में नहीं। यदि डेंगू संक्रमित मरीज को शार्क सिड्रोम या हैमरेजिग हो जाए तो वेंटिलेटर चाहिए। ऐसी स्थिति में मरीज को गुरु नानक देव अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों में भेजने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं। हैमरेजिग की स्थिति में तो मरीज को तत्काल वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। तीन प्रकार का होता है डेंगू बुखार

डेंगू बुखार मुख्यत: तीन प्रकार से होता है। पहला साधारण डेंगू बुखार, दूसरा डेंगू हैमरेजिक बुखार (डीएचएफ) और तीसरा डेंगू शॉक सिड्रोम (डीएसएस)। डेंगू शॉक सिड्रोम में मरीज की हालत होती है गंभीर

इनमें सबसे खतरनाक स्थिति है डेंगू शॉक सिड्रोम। इससे पीड़ित मरीजों को बेचैनी महसूस होना, तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा ठंडी होना, बेहोशी हावी होना, नाड़ी कभी तेज कभी धीरे चलना और ब्लड प्रेशर एकदम कम हो जाना। मरीज की सांस उखड़ती है, धड़कन बढ़ जाती है। धड़कनों को सामान्य रखने के लिए वेंटीलेटर में रखना अनिवार्य है। कार्डिक मानिटर, ब्लड प्रेशर की जांच, रेंडम प्लेटलेट्स कंस्टेंडर की जरूरत पड़ती है। साथ ही कुछ विशेष मेडिकल साल्यूशन मरीज को दिए जाते हैं। एकमात्र मेडिसिन डाक्टर, उन्हें भी बुला लेते हैं वीआइपी ड्यूटी पर

दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग आज भी मच्छरदानियों के सहारे मरीजों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। यहीं बस नहीं, सिविल अस्पताल में कार्यरत एकमात्र मेडिसिन डाक्टर कुणाल बांसल जो डेंगू मरीजों का उपचार करते हैं, उन्हें भी अचानक वीआइपी ड्यूटी पर बुला लिया जाता है। ऐसे में मरीजों की देखरेख नहीं हो पा रही। कोट्स

एफ्रेसिस मशीन को ठीक करवाया जा रहा है। अस्पताल में आइसीयू नहीं है, इसलिए वेंटिलेटर्स की सुविधा उपलब्ध नहीं। फिलहाल डेंगू के गंभीर मरीज को गुरु नानक देव अस्पताल में रेफर कर सकते हैं।

डा. चंद्रमोहन, एसएमओ, सिविल अस्पताल

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