डाक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा सेवाएं बेहाल, आज चंडीगढ़ कूच करेंगे

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पे-कमीशन की सिफारिशों को रद करवाने को आमादा डाक्टर लगातार हड़ताल पर हैं।

JagranFri, 23 Jul 2021 05:00 AM (IST)
डाक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा सेवाएं बेहाल, आज चंडीगढ़ कूच करेंगे

जागरण संवाददाता, अमृतसर: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पे-कमीशन की सिफारिशों को रद करवाने को आमादा डाक्टर लगातार हड़ताल पर हैं। सरकार भी हड़ताल समाप्त करवाने की दिशा में काम नहीं कर रही। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जलियांवाला बाग सिविल अस्पताल, ईएसआइ अस्पताल सहित जिले के सात ब्लाकों के अस्पतालों के डाक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। गुरुनानक देव अस्पताल में सुबह आठ से ग्यारह बजे तक ओपीडी सेवा बंद रही। शुक्रवार को प्रदेश भर के सरकारी डाक्टर मोहालील के फेस छह स्थित सिविल अस्पताल के बाहर इकट्ठा होंगे। यहां से सीएम हाउस की ओर कूच करेंगे। डाक्टरों ने सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन की योजना बनाई है। हालांकि पुलिस बल द्वारा इन्हें सीएम हाउस तक पहुंचने से काफी दूर ही रोक लिया जाएगा।

ईएसआइ इंप्लाइज फेडरेशन द्वारा पीसीएमएस डाक्टर्स एसोसिएशन के समर्थन में ईएसआइ अस्पताल में की जा रही हड़ताल 15वें दिन में प्रवेश कर गई। अस्पताल का सारा कामकाज ठप करके डाक्टरों व सहयोगी स्टाफ ने रोष प्रदर्शन किया। धरने में पीसीएमएस एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डा. मदन मोहन, व एमएलटी एसोसिएशन के चेयरमैन बाबा मलकीत सिंह भट्टी विशेष तौर पर शामिल हुए। डाक्टरों ने अस्पताल परिसर में रोष मार्च भी निकाला। फेडरेशन के प्रधान अशोक शर्मा ने कहा कि जब तक पे-कमीशन की डाक्टर व कर्मचारी विरोधी सिफारिशें वापस नहीं ली जातीं वे हड़ताल जारी रखेंगे। इस आंदोलन को सड़क तक ले जाया जाएगा। इस अवसर पर डा. दिलबाग सिंह, डा. राजेश भगत, डा. आलोक नारायण, डा. जुगल किशोर, डा. वंदना चितकारा, डा. रजनीत, डा. सिमरत गिल, डा. ललित सिघानिया, डा. शिखा भारद्वाज, डा. अवलीन, डा. गुरिदर सिंह, रविदर शर्मा, संजीव आदि उपस्थित थे।

सिविल अस्पताल में इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में डाक्टरों ने हड़ताल की। गुरुनानक देव अस्पताल में पंजाब स्टेट डेंटल एंड टीचर्स एसोसिएशन के बैनर तले डाक्टर हड़ताल पर रहे। पांचों सेटेलाइट अस्पतालों के अलावा सात ब्लाकों के सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की पीड़ा बढ़ रही है।

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