हवा में तैरने वाले 2.5 माइक्रो की जांच के लिए जीएनडीयू में लगेगा सेंसर

हवा में तैरने वाले 2.5 माइक्रो की जांच के लिए जीएनडीयू में लगेगा सेंसर

जापान के रिसर्च आफ ह्यूमनिटी एंड नेचर के सहयोग से गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में हवा की क्वालिटी को जांचने वाले सेंसर पीएम 2.5 को जल्द ही स्थापित किया जाएगा।

JagranSun, 09 May 2021 09:00 PM (IST)

हरीश शर्मा, अमृतसर : जापान के रिसर्च आफ ह्यूमनिटी एंड नेचर के सहयोग से गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में हवा की क्वालिटी को जांचने वाले सेंसर पीएम 2.5 को जल्द ही स्थापित किया जाएगा। इससे जीएनडीयू कैंपस के अलावा पूरे शहर की हवा क्वालिटी के आंकड़े तैयार किए जाएंगे। इससे पहले दरबार साहिब के पास ऐसा सेंसर लगाया गया है, जोकि वहां के आसपास की हवा का मूल्यांकन करता है। इस बात की जानकारी जीएनडीयू के बोटेनिकल एंड एनवायरमेंटल विभाग के प्रो. मनप्रीत सिंह भट्टी ने दी।

उन्होंने बताया कि सेंसर लगने हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए पहले से भी ज्यादा प्रयास किए जाएंगे। साथ ही इस पर गंभीरता से रिसर्च की जा सकती है। उन्होंने बताया कि जापान की उक्त संस्था के वैज्ञानिक प्रो. सचिको हयाशिदा के प्रयास से जीएनडीयू को यह सेंसर मुफ्त में मुहैया करवाया गया है।

प्रो. भट्टी ने बताया कि इस तरह के सेंसर शहर की जनसंख्या के हिसाब से लगाए जाने होते हैं। जैसे अमृतसर शहर की जनसंख्या दस लाख के करीब है तो यहां पर हवा की क्वालिटी जांचने के लिए तीन सेंसर लगाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में हवा में तैरने वाले 2.5 माइक्रो की जांच की जाएगी। सरकार के नियमों के मुताबिक 1980 तक 45 माइक्रो साइज की जांच की जाती थी। इसे 1995 में कम करके 10 माइक्रो कर दिया था। अब पिछले करीब पांच साल से 2.5 माइक्रो की जांच की जा रही है, क्योंकि यह माइक्रो बहुत ही छोटा होता है। ऐसे में आसानी से मुंह के जरिए शरीर में और सीधा फेफड़ों में चला जाता है। जोकि कई तरह की बीमारियां पैदा करता है। ऐसे में यह भी जांच की जाएगी कि हवा में तैरने वाला 2.5 माइक्रो किस तरह का है। अगर वह केवल मिट्टी का है तो उसका कोई नुकसान नहीं होता। इसी तरह अगर उसमें कार्बन या मेटल पाई जाती है तो कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है। अक्टूबर से दिसंबर तक की जाएगी जांच

प्रो. भट्टी ने बताया कि जापान के साथ हुए समझौते के तहत यह जांच अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक की जाएगी। इसी समय के दौरान ही पराली को जलाया जाता है। ऐसे में पराली जलाने से हवा की क्वालिटी में क्या बदलाव आता है और किस तरह का माइक्रो बनता है। उन पर गहन करना जरूरी है।

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