अनाज घोटाले की जांच पड़ी ठंडे बस्ते में

अनाज घोटाले की जांच पड़ी ठंडे बस्ते में
Publish Date:Thu, 29 Oct 2020 09:27 PM (IST) Author: Jagran

जासं, अमृतसर :

कोरोना काल में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए आए राशन में हुई गड़बड़ियों की जांच को प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यहां तक के इस मामले में अभी तक किसी को नामजद तक नहीं किया गया है। यही वजह है कि प्रशान इस मामले में कोई भी जवाब आरटीआइ के माध्यम से भी देना जरूरी नही समझा है। उधर वामपंथी दलों ने एक बार फिर संघर्ष शुरू करने का फैसला लिया है।

उल्लेखनीय है कि लाक डाउन के दौरान कई लोगों के रोजगार चले गए। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अलग-अलग विधान सभा क्षेत्रों में करोड़ों रुपए का राशन जरूरतमंदों तक बांटने के प्रदेश सरकार ने अपने नेताओं और वर्करों के माध्यम से योजना को लागू किया, परंतु नेताओं और वर्करों ने यह राशन जरूरतमंदों तक पहुंचाया ही नहीं।

वामदलों का आरोप है कि जिले में दस करोड़ से अधिक के अनाज का घोटाला हुआ, परंतु सरकार इस पर जांच के लिए तैयार नही है। माकपा के जिला सचिव सुच्चा सिंह अजनाला ने कहा कि सरकार को अपनी पार्टी के नेताओं के माध्यम से राशन बंटवाना ही गलत था। शहरी क्षेत्रों में तो सत्ताधारी पार्टी के वर्करों ने जिस क्षेत्र में 1000 लोगों के लिए राशन था वहां सिर्फ 100 से 150 लोगों तक ही राशन दिया गया। जबकि अमृतसर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में तो राशन बांटा ही नहीं गया। अलग अलग संगठनों की ओर से करीब 300 से अधिक ज्ञापन और प्रार्थना पत्र डीसी व अन्य अधिकारियों को जांच के लिए दिए। करीब 10 करोड़ की हेराफेरी अमृतसर जिले में ही होने की चर्चा है।

भाकपा के जिला सचिव अमरजीत सिंह आसल ने कहा सत्ताधारियों ने कोरोना काल में पार्टी वर्कर को ही राशन दिया। बाकी का राशन स्टोर कर लिया गया। राशन डीपो के माध्यम से बांटने की जगह निजी तौर पर बांटा गया।

पंजाब रेड़ही फड़ी यूनियन के राज्य अध्यक्ष डा इंद्रपाल सिंह ने कहा कि अमृतसर वेस्ट विधान सभा क्षेत्र 35 हजार जरूरतमंद परिवारों तक राशन न पहुंचने की रिपोर्ट उनके पास पहुंची। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस पर ज्ञापन भी तहसील स्तर पर दिए परंतु कोई सुनवाई नही हुई। नेशनल पीपुल्स फ्रंट के जिला संयोजक कुलदीपक मेहता ने कहा कि उनके संगठन ने इस संबंधी आरटीआइ से भी जवाब मांगा है परंतु अभी तक जवाब नही मिला है।

जिला फूड व सिविल सप्लाई आफिसर जसजीत कौर ने कहा कि विभाग के पास काफी शिकायतें पहुंची थी जिनमें से कुछ जो गंभीर मामले थे उनकी जांच चल रही है। कोरोना काल के दौरान आया सारा राशन जिला प्रशासन के माध्यम से बांट गया था। उस राशन के आवंटन का रिकार्ड पूरी तरह सही उनके पास पहुंच गया है। डीपो के कुछ मामले अभी लंबित हैं।

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