इतिहास में पहली बार, अमृतसर जिले से पांच खिलाड़ियों ने ओलंपिक में बनाई जगह

टोक्यो में होने वाली ओलंपिक खेलों के लिए महिला और पुरुष भारतीय हाकी टीम की घोषणा कर दी गई है।

JagranSat, 19 Jun 2021 08:00 AM (IST)
इतिहास में पहली बार, अमृतसर जिले से पांच खिलाड़ियों ने ओलंपिक में बनाई जगह

हरदीप रंधावा, अमृतसर: टोक्यो में होने वाली ओलंपिक खेलों के लिए महिला और पुरुष भारतीय हाकी टीम की घोषणा कर दी गई है। इसमें जिला अमृतसर से महिलाओं की टीम से गुरजीत कौर और पुरुषों की टीम से हरमनप्रीत सिंह, गुरजंट सिंह, दिलप्रीत सिंह और शमशेर सिंह को खेलने का मौका मिला है। पुरुष टीम से अमृतसर से हाकी खिलाड़ी हरमनप्रीत दूसरी बार, गुरजंट, दिलप्रीत और शमशेर पहली बार व महिला खिलाड़ी गुरजीत कौर भी पहली बार ओलंपिक का हिस्सा बनेंगे।

महिला व पुरुष भारतीय हाकी टीम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से शामिल आठ खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी वर्चुअल जुडे़। आनलाइन मीटिंग के दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके पारिवारिक सदस्यों को बधाई दी और हर खिलाड़ी को पांच-पांच लाख रुपये उपहार के रूप में दिए। पुरुषों की भारतीय हाकी टीम में राज्य के आठ खिलाड़ी ओलंपिक का हिस्सा बने हैं और इतिहास में पहली बार हुआ है कि सीमांत जिला अमृतसर से पांच हाकी खिलाड़ी ओलंपिक में देश को पदक दिलाने के लिए मैदान में डटेंगे। यह गुरुनगरी के लिए भी भी गर्व की बात है। सभी खिलाड़ी बेंगलुरु में चल रहे कोचिग कैंप में खेल की बारीकियां सीखते हुए जीत के लिए रणनीति बना रहे हैं। ओलंपिक में चुने गए खिलाड़ियों के अभिभावकों की खुशी का नहीं है ठिकाना

दूसरी बार खेल रहा बेटा हरमन, बेहद खुशी

हरमनप्रीत सिंह के पिता सर्बजीत सिंह व माता राजविदर कौर का कहना है कि बेटा दूसरी बार ओलंपिक के लिए खेल रहा है। यह उनके लिए बेहद खुशी की बात है। सर्बजीत ने बताया कि वह किसान हैं और खुद भी वह कबड्डी के साथ-साथ हाकी के शौकीन रहे हैं। पांचवीं में ही हरमनप्रीत ने हाकी को हाथ को उठा लिया था जबकि उनके दूसरे भाई कोमलप्रीत सिंह का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनका भाई ओलंपिक के लिए चयनित हुआ है। जूनियर व‌र्ल्ड कप में गुरजंट ने जीता था खिताब

ओएनजीसी की तरफ से ओलंपिक में खेलने वाले गुरजंट सिंह के पिता बलदेव सिंह व सुखजिदर कौर ने बताया कि साल-2016 में जूनियर व‌र्ल्ड कप में उनके बेटे को मैन आफ द मैच का खिताब मिला था। इसके बाद सीनियर टीम में शामिल होकर अब ओलंपिक का हिस्सा बना है। अपने मामा हरदेव सिंह चाहल की प्रेरणा और बटाला की शाहबाद हाकी अकादमी में कोच रंजीत सिंह से प्राथमिक कोचिग ली। इसके बाद चंडीगढ़ में पढ़ाई व खेल जारी रखी है। चार साल की आयु में शमशेर सिंह खेलने लगे थे

शमशेर सिंह के पिता हरदेव सिंह व मां हरप्रीत कौर ने बताया कि उनका बेटा शमशेर सिंह नई दिल्ली में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में बतौर कैशियर के रूप में ब्रांच में सेवा निभा रहा है। वह गांव में ही कृषि करते हैं और उनका दूसरा बेटा हरजोत सिंह स्टडी बेस पर यूनाइटेड किग्डम (यूके) में है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा शमशेर सिंह लगभग चार साल की आयु का था जब वह अटारी ग्राउंड में जाकर खेलता था और ओलंपिक में सेलेक्शन से उसकी मेहनत चमकी है। दिलप्रीत के दादा और पिता रहे हैं नेशनल खिलाड़ी

दिलप्रीत सिंह के पिता बलविदर सिंह ने बताया कि वह खुद एक हाकी कोच हैं। 1990 से लेकर 1996 तक नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। महाराजा रंजीत सिंह हाकी अकादमी सहित विभिन्न हाकी अकादमियों में 14 साल तक कोचिग दे चुके हैं। दिलप्रीत के दादा सूबेदार गुरनाम सिंह एथलेटिक्स में 1957 से लेकर 1964 तक नेशनल खिलाड़ी रहे हैं। उनका परिवार खेलों से जुड़ा होने की वजह से लोगों को भी प्रेरित करता है। उन्हें विश्वास है कि दिलप्रीत ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करेगा। ओलंपिक में सेलेक्शन गुरजीत की मेहनत का परिणाम

गुरजीत कौर के पिता सतनाम सिंह, भाई यादविदर सिंह व उनकी बहन प्रदीप कौर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि गुरजीत कौर ने हाकी टीम में शामिल होकर ओलंपिक के लिए जगह बनाई है। यह उसकी मेहनत का परिणाम है। उसके जरिए अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। प्रदीप कौर ने कहा कि वह खुद 2010 से लेकर 2016 तक नेशनल खेली हैं। इस समय में संसारपुर में बतौर हाकी कोच सेवा निभा रही हैं जबकि गुरजीत नार्दर्न सेंट्रल रेलवे में सेवा निभा रही हैं।

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