अमृतसर से खालसा ब्लड डोनेट यूनिटी संस्था और नीना रामपाल को रक्तदान के लिए स्टेट अवार्ड मिला

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान को समर्पित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह सोमवार को सरकारी मेडिकल कालेज में आयोजित किया गया।

JagranMon, 11 Oct 2021 07:04 PM (IST)
अमृतसर से खालसा ब्लड डोनेट यूनिटी संस्था और नीना रामपाल को रक्तदान के लिए स्टेट अवार्ड मिला

जासं, अमृतसर: राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान को समर्पित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह सोमवार को सरकारी मेडिकल कालेज में आयोजित किया गया। पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल व पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के सहयोग से आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी मुख्य मेहमान के तौर पर पहुंचे। इस समारोह में कोरोना काल में पैदा हुए ब्लड संकट के दौरान मसीहा बनकर रक्त उपलब्ध करवाने वाली संस्थाओं और लोगों को स्टेट अवार्ड देकर सम्मानित किया गया।

इसमें राज्य भर से तीन श्रेणियों में पांच समाज सेवी संस्थाओं, पांच पुरुषों और पांच महिलाओं को चुनकर नवाजा गया, ताकि उनसे प्रेरित होकर समाज के बाकी लोग भी रक्तदान के लिए आगे आएं। इनमें अमृतसर से खालसा ब्लड डोनेट यूनिटी को संस्था की श्रेणी में और नीना रामपाल को स्टेट अवार्ड मिला है। कार्यक्रम में सोनी ने कहा कि लगभग एक साल में कोविड महामारी के बावजूद पंजाबियों ने 3.75 लाख यूनिट रक्तदान किया है। इसके लिए सभी रक्तदानी बधाई के पात्र हैं। सम्मान समारोह शुरू होने से पहले कलाकारों ने नाटक पेश किया जिसमें रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया गया। इस मौके पर मेयर कर्मजीत सिंह रिटू, डिप्टी कमिश्नर (डीसी) गुरप्रीत सिंह खैहरा, पुलिस कमिश्नर (पीसी) डा. सुखचैन सिंह गिल, काउंसिल से डा. सुनीता देवी, सिविल सर्जन डा. चरनजीत सिंह, डा. विनय मोहन, डा. सुखविदर कौर, डा. मीनू सिंह, पवन रेखा बेरी आदि मौजूद थे।

ये हैं पांच संस्थाएं

लुधियाना से भाई कन्हैया जी मिशन सेवा सोसायटी को 6211 बार रक्तदान करवाने पर तरनजीत सिंह निमाना, फाजिल्का से श्री राम कृपा सेवा सिंह वेलफेयर सोसायटी को 4130 बार रक्तदान करने पर राजीव कुकरेजा, अमृतसर से खालसा ब्लड डोनेट यूनिटी को 3819 बार रक्तदान करने पर रक्तदाता अमनदीप सिंह, लुधियाना से रहिरास सेवा सोसायटी को 3381 बार रक्तदान करने पर सुखविदर सिंह कैरों और संगरूर से मालवा फ्रेंड्स क्लब धूरी को 2620 बार रक्तदान करने पर गुरदर्शन सिंह को स्टेट अवार्ड हासिल हुआ है। पांच महिलाएं

बठिडा से शीला देवी को 65, जालंधर से हरविदर कौर को 58, नीरजा को 50, डा. कमलजीत कौर को 33 और अमृतसर से नीना रामपाल को 30 बार रक्तदान करने पर सम्मान मिला है। पांच पुरुष

जालंधर से कश्मीर बंगा को 174 बार, जतिदर सोनी को 135, बठिडा से सुरेंद्र गर्ग को 130, पवन मेहता को 128 और मानसा से संजीव सिगला को 125 यूनिट ब्लड डोनेट करने पर सम्मान मिला है।

दोस्त के पिता को रक्त के लिए जूझते देखा तो शुरू किया रक्तदान का सिलसिला

भाई घनैया जी मिशन सेवा सोसायटी लुधियाना से तरनजीत सिंह निमाना ने बताया कि वह लगभग पिछले 15 साल से रक्तदान की सेवा कर रहे हैं। उनकी सोसायटी अब तक 472 रक्तदान कैंप लगा चुकी है। सोमवार को दसवीं बार पंजाब सरकार ने उन्हें 6211 ब्लड के यूनिट एकत्रित करने की वजह से राज्य स्तरीय सम्मान मिला है। वहीं तीन बार राज्य की सर्वोत्तम समाज सेवी संस्था का अवार्ड भी मिल चुका है। तरनजीत निमाना बिजनेसमैन हैं। वह बताते हैं कि उनके एक दोस्त के पिता को कैंसर था। उन्हें रक्त की जरूरत थी। एक यूनिट हासिल करने के लिए बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा था, क्योंकि रक्त ब्लैक में मिलता था। बस उसी दिन से उन्होंने रक्तदान का फैसला किया था, जो आज तक जारी है। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे के लिए खून दिया तब से जारी रखा महादान

जालंधर स्थित सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक से सम्मान हासिल करने के लिए आए कारपेटर कश्मीर बंगा ने बताया कि उन्होंने लगभग 26 साल पहले रक्तदान करना शुरू किया था। 174 बार रक्तदान करने की वजह से पंजाब सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है। कश्मीर बंगा ने बताया कि वह डा. बीआर आंबेडकर ब्लड डोनर एसोसिएशन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त की मौसी को रक्त की बेहद जरूरत थी तब उन्होंने पहली बार रक्त दिया था। इसके उपरांत थैलेसीमिया के बच्चे के लिए रक्त दिया तो तब से वह आज तक इस बीमारी से पीड़ित बच्चों व अन्य जरूरतमंद लोगों को रक्त देते आ रहे हैं। उनको देखकर उनका नौ वर्षीय बेटा सुखविदर बंगा भी रक्तदान करना चाहता है। आंगनबाड़ी वर्कर शीला देवी ने पति को देखकर शुरू किया था रक्तदान करना

बठिडा जिले के रामपुरा फूल स्थित सिविल अस्तपाल के ब्लड बैंक से आई शीला देवी ने बताया कि वह एक आंगनबाड़ी वर्कर हैं। उनके पति कमलेश कुमार लगभग तीस साल से रक्तदान करते आ रहे हैं। उन्होंने अपने पति की तरफ देखकर ही रक्तदान करना शुरू किया था, क्योंकि जब वह रक्तदान करके आते थे, तो वह अकसर बेहद खुशी महसूस करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उनके रक्त की एक एक बूंद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन दान देगी। शीला देवी ने कहा कि वह आज तक 65 बार रक्तदान कर चुकी हैं। आंगनबाड़ी के साथियों को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित करती हैं, क्योंकि रक्तदान से व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती है।

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