आग लगने से जर्जर हुई 150 साल पुरानी डीसी दफ्तर की इमारत को मिलेगा नया रूप

हरीश शर्मा, अमृतसर

कचहरी परिसर में 150 साल पुराने डीसी दफ्तर, जोकि चार साल पहले आग लगने के कारण पूरी तरह जर्जर हो गया था, की इमारत विद्यार्थियों और पढ़ने के शौकीन लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनेगा, क्योंकि इस इमारत में अब मश्हूर आर्किटेक्ट भाई राम सिंह के नाम पर लाइब्रेरी तैयार की जाने वाली है। इमारत के ग्राउंड फ्लोर और फ्सर्ट फ्लोर पर लाइब्रेरी बनाने की योजना है। इसी इमारत की एक साइड में कैफेटेरिया बनाया जाएगा ताकि वहां से कुछ फंड भी आता रहे। कैफेटेरिया के लिए बकायदा टेंडर कॉल किए गए हैं, जिसमें बहुत सारी कंपनियों ने रूचि भी दिखाई है।

योजना के अनुसार फिलहाल इस इमारत में टाउन हाल में चल रही नगर निगम की लाइब्रेरी को शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही नई किताबें व अन्य मटीरियल भी रखा जाएगा। टाउन हाल लाइब्रेरी में फुट फाल लगभग जीरो होने के कारण वह दम तोड़ रही है। किताबें भी रैक में लगी-लगी धूल चाट रही हैं। इस कारण वह पूरी लाइब्रेरी अब इस इमारत में शिफ्ट कर दी जानी है। बता दें कि इस दफ्तर की रिपेयरिग का काम करीब दो साल पहले शुरू किया गया था, जोकि अब 80 प्रतिशत खत्म हो चुका है। बाकी का बचा हुआ 20 प्रतिशत काम अगले तीन महीने तक खत्म कर लिया जाएगा। इसकी डेडलाइन जून महीना रखी गई है।

प्रोजेक्ट पर खर्च किए जाएंगे पांच करोड़ रुपये

इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें दो फ्लोर पर लाइब्रेरी, कैफेटेरिया, टूरिस्ट को आर्कषित करने के लिए पब्लिक आर्ट भी लगाया जा रहा है। साथ ही इमारत के सामने बने गार्डन को पूरी तरह से डेवलप कर खूबसूरत फूलों से सजाया जाना है। उसमें लाइटिग की जानी है। इमारत में लगने वाले लाइटिग की सारी फिटिग विदेशी ही इस्तेमाल हो रही है, जिसमें इटली, जापान और फ्रांस के ब्रांड शामिल हैं।

भाई राम सिंह के नाम पर बनेगी लाइब्रेरी

इस पूरे प्रोजेक्ट पर काम कर रही हृदय सिटी एंकर आर्किटेक्ट गुरमीत राय ने बताया कि शहर में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आर्किटेक्ट भाई राम सिंह कौन थे। उनके बारे में हर किसी को जानकारी होनी जरूरी है। इसलिए उन्हीं के नाम पर लाइब्रेरी बनाई जा रही है। भाई राम सिंह ने ही खालसा कॉलेज जैसी ऐतिहासिक इमारत को डिजाइन किया था। इसके अलावा शहर में बहुत सारी हेरिटेज जगह हैं, जिन्हें भाई राम सिंह ने डिजाईन किया था। इनमें हाल गेट स्थित आइटीआइ, सारागाड़ी गुरुद्वारा भी शामिल है। मगर उनके नाम से शहर में कुछ भी नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार के समक्ष भाई राम सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस इमारत को भी करीब 150 साल पहले अंग्रेजो ने ही तैयार करवाया था और भाई राम सिंह ने ही इसे भी डिजाइन किया था। मगर आग लगने के बाद इस इमारत की हालत खस्ता हो गई थी। इस कारण बहुत ही सूझ-बूझ के साथ इसे रिपेयर करके हेरिटेज में शामिल किया गया है। इसके अलावा कचहरी परिसर में लोगों की फुटफाल काफी ज्यादा है जिससे इस लाइब्रेरी को काफी रिस्पांस मिलने की उम्मीद है।

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