ऐसे भी डाक्टर हैं... पत्नी को एडमिट दिखा आयुष्मान भारत योजना में लगा रहा था चपत, अमृतसर में 4 अस्पतालों पर एक्शन

अमृतसर में चार निजी अस्पताल आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना में फर्जीवाड़ा करते मिले हैं। (सांकेतिक फोटो)

अमृतसर में आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां चार निजी अस्पताल फर्जी तरीके से मरीजों को उपचाराधीन दिखाकर सरकार को चपत लगाते पाए गए हैं। अभी स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें योजना से अलग कर दिया है।

Pankaj DwivediSun, 10 Jan 2021 08:46 PM (IST)

अमृतसर, जेएनएन। आम लोग डाक्टर को भगवान का दूसरा रूप मानते हैं लेकिन अमृतसर के कुछ निजी अस्पतालों के डाक्टरों ने अपने पेशे को कलंकित कर दिया है। यहां एक्स सर्विसमेन हेल्थ कंट्रीब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) घोटाले के बाद अब आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक अस्पताल चला रहे डाक्टर ने तो हद ही कर दी। उसने पत्नी का ही फर्जी कार्ड बनाकर उसे अस्पताल में एडमिट दिखा सरकार को चूना लगाया। कुल चार निजी अस्पतालों- मीरांकोट स्थित वर्मा अस्पताल, छेहरटा गुरु की वडाली स्थित मनु अरोड़ा अस्पताल, संधू लाइफ केयर व न्यू लाइफ अस्पताल फर्जीवाड़ा करते मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए सभी को इस बीमा योजना से अलग कर दिया है।

मनु अरोड़ा अस्पताल के संचालक ने अपनी पत्नी का फर्जी कार्ड बनवाकर उसे एडमिट किया था। उसकी पत्नी बीमार नहीं थीं। जब टीम यहां जांच करने पहुंची तो रिकार्ड में पूनम अरोड़ा का नाम देखकर मरीज के बारे में पूछा। टीम को बताया गया कि मरीज को एमआरआइ करवाने भेजा है। टीम ने गहनता से जांच की तो स्पष्ट हुआ कि पूनम अरोड़ा तो अस्पताल के संचालक डा. मनु अरोड़ा की पत्नी हैं।

बिना सर्जन आपरेशन, मृत मरीज आईसीयू में भर्ती दिखाए

वर्मा अस्पताल में मरीज नहीं था, लेकिन फर्जी तरकी से उसका उपचार चल रहा था। न्यू लाइफ अस्पताल में सर्जन नहीं था। इसके बावजूद रिकार्ड में मरीज का आपरेशन दर्शाया जा रहा था। वहीं, संधू लाइफ केयर अस्पताल में मरे हुए मरीज को आइसीयू में रखकर उपचार दिखाया जा रहा था।

घोटाला करने वालों की मान्यता रद होगीः सिविल सर्जन

डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डा. गुरमीत कौर ने बताया कि हायर अथारिटी को इस बारे में जानकारी दे दी है। अथारिटी ही इन अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम है। फिलहाल, इनकी योजना से जुड़ी मान्यता समाप्त कर दी गई है। अमृतसर में दस सरकारी और 87 निजी अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा गया है। सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह ने कहा कि शहर के सभी 87 अस्पतालों की दोबारा जांच करवाई जाएगी। योजना में घोटाला करने वाले अस्पतालों की मान्यता रद होगी।

पिछले साल उजागर हुआ था ईसीएचएस घोटाला

गौरतलब है कि अमृतसर में पिछले वर्ष भी ईसीएचएस घोटाला भी उजागर हुआ था। इसके तहत पूर्व सैनिकों के फर्जी कार्ड तैयार करवाकर मरीजों का उपचार किया जा रहा था। कई अस्पताल तो मरीज के उपचार के बगैर ही सरकार से क्लेम ले रहे थे। इस मामले में जिला पुलिस ने शहर के 16 डाक्टरों सहित 24 लोगों पर केस दर्ज किया था।

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