Bihar Assembly Elections 2020 : पश्चिम चंपारण में दोनों गठबंधनों के लिए अपने-अपने कुनबों को बचाना बड़ी चुनौती, जानिए अभी किस तरह की है आपाधापी

चुनाव से पहले ही दलों के दिल में राग और अनुराग की जगह सुराख है।
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:45 AM (IST) Author: Ajit Kumar

पश्चिम चंपारण, [ सुनील आनंद ]। पश्चिम चंपारण में टिकट की चाहत में रस्साकशी है। गठबंधन कोई हो, दलों की अपनी-अपनी दावेदारी है। सीट एक वो भी तय नहीं, पर उम्मीदवारी की रेस में भागीदारी पक्की है। टिकट की आपाधापी में अब गठबंधन की मर्यादा नहीं रही। चुनाव से पहले ही दलों के दिल में राग और अनुराग की जगह सुराख है। आपसी दूरी बढ़ गई है। टिकट चाहे जिसे मिले, चुनावी दंगल में गठबंधन के घटक दलों व कार्यकर्ताओं की आपसी दूरी समीकरण बिगाड़ रही है। भितरघात की वजह से कई सीटों पर वर्चस्व को भी झटका लग सकता है। कार्यकर्ताओं की खेमाबंदी दिख रही है। यह शीर्ष नेतृत्व भी समझ रहा, इसीलिए वर्चुअल संवाद से एकजुटता का पाठ पढ़ा रहा है। लेकिन, व्यक्तिगत हित के आगे सब बेअसर है। 

जदयू के ही आधा दर्जन नेता टिकट की दौड़ में

वाल्मीकिनगर में लोकसभा का उपचुनाव भी होना है। एनडीए में यह क्षेत्र जदयू कोटे में है। यहां जदयू के ही आधा दर्जन नेता टिकट की दौड़ में हैं। कार्यकर्ताओं की खूब गुटबाजी हो रही। कुछ इसी तरह के हालात यूपीए मेें भी है। वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय उम्मीदवार थे। इस बार राजद की ओर से भी दावेदारी पेश की जा रही।

चंपारण में जदयू पर भाजपा का पक्ष भारी

विधानसभा चुनाव में जदयू बड़े भाई की भूमिका में है, लेकिन पश्चिम चंपारण का हिसाब जरा अलग है। जिले के राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि चंपारण की धरती पर जदयू की हैसियत छोटे भाई की है। यह तो सीट से ही तय हो जाता है। पश्चिम चंपारण की नौ विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा का कब्जा है। पूर्वी चंपारण चले जाइए तो वहां की 12 में सात पर भाजपा काबिज है। कुल 21 सीटों पर भाजपा-जदयू का अनुपात 12:1 है।

हालांकि, यह तस्वीर उस वक्त की है, जब 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू, भाजपा से अलग हो गया था। अब, जब समीकरण पुराने ट्रैक पर आ गए हैं तो सीटों का तालमेल भी बदलेगा।

यूपीए में पटना और रांची की दौड़

टिकट के लिए यूपीए में भी भावी उम्मीदवारों की भीड़ से हलचल है। कांग्रेस में उम्मीदवारों की सूची इतनी लंबी हो गई है कि प्रदेश नेतृत्व ने अब बायोडाटा लेने से इन्कार कर दिया है। जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों से दोनों ही दल के आधा दर्जन से अधिक उम्मीदवार एक सीट के दावेदार हैं। वाल्मीकिनगर, नौतन और बेतिया से रालोसपा ने भी दावेदारी ठोकी है। बेतिया और नरकटियागंज पर कांग्रेस का कब्जा है, वहां से राजद के उम्मीदवारों की भी मजबूत दावेदारी है। सभी संभावित पटना और रांची की दौड़ लगा रहे। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि टिकट बंटवारे तक का सारा खेल है, जिस दिन बेटिकट हुए बागी बनते देर न लगेगी।  

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