Ayodhya Issue: इकबाल अंसारी की अपील- विवादित ढांचा ध्वंस के सभी आरोपियों को किया जाए बरी

Ayodhya Issue: इकबाल अंसारी की अपील- विवादित ढांचा ध्वंस के सभी आरोपियों को किया जाए बरी

Ayodhya Disputed Structure Demolition Case बाबरी मस्जिद के विवाद में मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी ने कोर्ट से अपील की है विवादित ढांचा ध्वंस के सभी आरोपियों को बरी कर दें।

Dharmendra PandeyThu, 17 Sep 2020 01:18 PM (IST)

अयोध्या, जेएनएन। भगवान राम की नगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि प्रांगण में भूमि पूजन के बाद भव्य मंदिर निर्माण के लिए नींव की खोदाई के कार्यक्रम के बीच में ही 30 सितंबर की तारीख भी बेहद अहम होगी। लखनऊ में सीबीआइ कोर्ट 30 को अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वंस मामले का फैसला सुनाएगी। इस फैसले को लेकर अयोध्या में राम मंदिर तथा बाबरी मस्जिद के विवाद में मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी ने कोर्ट से अपील की है कि विवादित ढांचा ध्वंस के सभी आरोपियों को बरी कर दें।

बाबरी पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि यह बड़ा मसला सुप्रीम कोर्ट में रहा और सुप्रीम कोर्ट से फैसला भी आ गया है। यह फैसला मंदिर के हक में आया। विवादित ढांचा ध्वंस के केस में सभी आरोपियों के बयान हो चुके हैं और इनमें से बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो इस दुनिया में नहीं है। अंसारी ने कहा कि इस केस में जो अभी भी आरोपी हैं, वह सब भी बहुत बुजुर्ग हो चुके हैं। अब तो हम यह चाहते हैं कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जितने भी मुकदमे हैं उन को समाप्त कर देना चाहिए। इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या का मसला हिंदू व मुसलमान के बीच का एक बड़ा विवाद बन गया था और यह राजनीति में आ गया था। इस मसले पर अब जबकि सुप्रीम कोर्ट से फैसला आ गया है तो सरकार को चाहिए कि इस मसले को पूर्ण रूप से खत्म कर दे। हम यह चाहते हैं कि हिंदू और मुसलमान मंदिर और मस्जिद के नाम पर कोई भी ऐसा काम न करें जो देश की तरक्की में बाधा बने।

अंसारी ने कहा कि धर्म के नाम पर यदि कोई भी विवाद रहता है तो इससे देश कमजोर होता है। मैं यह चाहता हूं कि हमारे देश में बाबरी मस्जिद और राम जन्म भूमि के मामले पर जो भी मुकदमे हैं वह जल्दी से जल्दी समाप्त किए जाएं।

इकबाल अंसारी को पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि तथा नींव पूजन के अवसर पर विशिष्ट लोगों से साथ आमंत्रित किया गया था। उस अवसर को उन्होंने बेहद गौरवशाली क्षण भी बताया था।

सुप्रीम कोर्ट का 30 को फैसला का निर्देश, विशेष जज सुरेंद्र यादव की टीम फैसला लिखवाने में लगी

अयोध्या के विवादित ढांचा ध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और यूपी के सीएम रहे कल्याण सिंह, भाजपा नेता विनय कटियार, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की सीएम रहीं उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा समेत 32 लोग आरोपी बनाए गए थे। इस मामले में एक सितम्बर से सीबीआई की विशेष अदालत में बचाव व अभियोजन पक्ष की ओर से मौखिक बहस पूरी कर ली थी। जिसके बाद सीबीआई के विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला लिखवाना शुरू कर दिया है। इस मामले में छह दिसंबर 1992 को कुल 50 एफआइआर दर्ज हुई थी। तीन जांच एजेंसियों ने मिलकर इसकी विवेचना की।

कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस प्रकरण में 30 सितंबर तक फैसला देना है। इस समय विशेष अदालत में 32 आरोपितों पर केस चल रहा है। 17 आरोपितों का निधन हो चुका है। इनमें परमहंस रामचंद्रदास समेत बाला साहेब ठाकरे, अशोक सिंहल, गिरिराज किशोर व विष्णु हरि डालमिया आदि प्रमुख हैं। सीबीआइ ने कई चरणों में आरोपपत्र दाखिल कर अभियोजन पक्ष को साबित करने के लिए 994 गवाहों की सूची अदालत में दाखिल की। इसमें सुनवाई के दौरान 354 गवाह पेश किए गए। विशेष अदालत ने फैसले के दिन आरोपितों को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि 2010 में 30 सितंबर को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने अयोध्या विवाद पर अहम फैसला सुनाया था।

कई लोगों ने दर्ज कराई थी एफआइआर

अधिवक्ता केके मिश्र ने बताया कि विवादित ढांचा ध्वंस मामले की पहली रिपोर्ट (197/92) इंस्पेक्टर रामजन्मभूमि प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने थाना रामजन्मभूमि में 40 लोगों को नामजद करते हुए लाखों अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसी दिन दूसरी रिपोर्ट (198/92) चौकी इंचार्ज राम जन्मभूमि जीपी तिवारी ने अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसके अलावा 48 रिपोर्टें मीडियाकर्मियों की ओर से दर्ज कराई गईं।

इनके खिलाफ दाखिल हुआ था आरोपपत्र

इस मामले की जांच कर रही सीबीआइ ने अपराध संख्या 197/92 की विवेचना करते हुए 40 आरोपितों के विरुद्ध चार अक्टूबर 1993 को विशेष अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (अयोध्या प्रकरण) लखनऊ के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें बालासाहेब ठाकरे, लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, अशोक सिंहल, विनय कटियार, मोरेश्वर सावे, पवन पांडे, बृजभूषण शरण सिंह, जय भगवान गोयल, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, महाराज स्वामी साक्षी, सतीश प्रधान, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, विनोद कुमार वत्स, रामचंद्र खत्री, सुधीर कक्कर, अमरनाथ गोयल, संतोष दुबे, प्रकाशशर्मा, जय भान सिंह पवैया, धर्मेंद्र सिंह गुर्जर, राम नारायण दास, रामजी गुप्ता, पूर्व विधायक लल्लू सिंह, चंपत राय बंसल, ओम प्रकाश पांडे, लक्ष्मी नारायण दास महा त्यागी, विनय कुमार राय, कमलेश त्रिपाठी, गांधी यादव, हरगोविंद सिंह, विजय बहादुर सिंह, नवीन भाई शुक्ला, रमेश प्रताप सिंह, आचार्य धर्मदेव, आरएन श्रीवास्तव एवं देवेंद्र बहादुर राय को आरोपित बनाया गया था।

रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित हुआ केस

उप्र सरकार ने 1993 में केस की अग्रिम विवेचना सीबीआइ से कराने की संस्तुति केंद्र सरकार से की थी। इसके बाद सीबीआइ ने 27 अगस्त 1993 को जांच शुरू की। 24 जनवरी 1994 को रायबरेली की कोर्ट में सीबीआइ ने अनुरोध किया कि इस प्रकरण से संबंधित दूसरा मामला लखनऊ की विशेष अदालत में चल रहा है लिहाजा इस केस को भी लखनऊ की विशेष अदालत को स्थानांतरित कर दिया जाए। जिस पर विशेष अदालत ने जिला जज रायबरेली को सूचित करते हुए मामले को लखनऊ की अदालत भेज दिया।

कल्याण सिंह को नहीं करानी पड़ी थी जमानत

सुप्रीम कोर्ट के 19 अप्रैल 2017 के निर्णय के उपरांत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को छोड़कर अन्य आरोपितों ने लखनऊ की विशेष अदालत में हाजिर होकर जमानत कराई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि आरोपित कल्याण सिंह मौजूदा समय में राजस्थान के राज्यपाल हैं तथा संविधान के अनुच्छेद 360 के अंतर्गत पद पर रहने के दौरान उनके विरुद्ध अदालती कार्यवाही नहीं की जा सकती। राज्यपाल पद से हटने के बाद उनके हाजिर होने पर सभी आरोपितों के साथ-साथ उनके विरुद्ध भी अदालती कार्यवाही प्रारंभ की गई।  

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.