संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस: महामारी व अफगानिस्तान समेत कई अहम मुद्दों पर बोले विदेश मंत्री जयशंकर व ब्लिंकन

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन पहली बार भारत दौरे पर आए हैं। यहां वे दो दिनों के लिए हैं। उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव अजीत डोभाल से मुलाकात की। जयशंंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में ब्लिंकन ने महामारी और अफगानिस्तान की चर्चा की।

Monika MinalWed, 28 Jul 2021 08:58 AM (IST)
दो दिनों के लिए भारत में हैं अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी

नई दिल्ली, एएनआइ। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन व भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के मजबूती का संकेत दिया। ब्लिंकन ने भारत आने पर खुशी जाहिर की और कहा, 'कोरोना ने अमेरिका और भारत दोनों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया। भारत ने हमें महामारी में सहायता प्रदान की। उस सहायता को हम नहीं भूलेंगे। हमने अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की।'

ब्लिंकन ने आगे कहा, 'हम अफगानिस्तान से बलों की वापसी के बाद अफगान के लोगों के लिए और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।'वहीं जयशंकर ने कहा, 'हमने आज वैक्सीन को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराने और सस्ता बनाने के लिए इसका उत्पादन बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया।' उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान के लिए ये जरूरी है कि शांति चर्चाओं को सभी गंभीरता से लें। दुनिया एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक और स्थिर अफगानिस्तान देखने की कामना करती है।

 ब्लिंकन से बातचीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'हमारा दि्वपक्षीय संबंध उस स्तर तक पहुंच गया है जिससे हम मिलकर बड़े मुद्दों से डील कर सकते हैं।' कोविड मामले को स्वाभाविक तौर से प्राथमिकता बताते हुए जयशंकर ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ब्लिंकन के साथ यह मुलाकात अहम पड़ाव है।

ब्लिंकन ने उठाया अफगानिस्तान का मुद्दा 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान में तालिबानी हिंसा का मुद्दा उठाया और कहा कि यह देश के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। अफगानिस्तान में शांंति का एकमात्र जरिया समझौता ही है और इसपर गंभीरता से काम करना होगा। 

दो दिवसीय दौरे पर भारत आए अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने आज अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'हमने जो साथ में काम किया और आने वाले समय में जो करेंगे उसकी सराहना करात हूं।'  इससे पहले उन्होंने सिविल सोसायटी आर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इसके बाद ब्लिंकन ने ट्वीट कर कहा, 'लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को भारत और अमेरिका साझा करते हैं और यही हमारे बीच संबंध की आधारशिला है जो भारत के बहुलवादी समाज को दर्शाता है।' आज सुबह ही ब्लिंकन ने राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव (NSA) अजीत डोभाल से साउथ ब्लॉक जाकर मुलाकात की।

इस दौरान कोविड-19 और इंडो-पैसिफिक समेत अनेकों अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। ब्लिंकन के आने से भारत-अमेरिका के के बीच वर्ष 2024 तक द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

जयशंकर और ब्लिंकन के बीच बैठक में क्षेत्रीय मुद्दे भी उठेंगे। दोनों पक्षों की तरफ से बताया गया कि अफगानिस्तान की स्थिति एक बड़ा मुद्दा होगा। साथ ही चीन व भारत के बीच सैन्य तनाव का मुद्दा भी उठने की संभावना है। अमेरिकी पक्ष रक्षा मुद्दों को लेकर ज्यादा जोर दे रहा है। इस बात का प्रमाण उसके विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान है।

आज होने वाली यह मुलाकात कई मायनों में काफी अहम होगी। ब्लिंकन की यह पहली भारत यात्रा है जिसके लिए वे मंगलवार देर शाम नई दिल्ली पहुंचे हैं। उनके भारत में कदम रखने के साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने द्विपक्षीय रिश्तों पर एक बयान जारी किया जिसमें भारत को एक मजबूत रणनीतिक साझीदार बताया गया है।

ब्लिंकन आज प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का संदेश देंगे। यह संदेश खास तौर पर क्वाड देशों (भारत, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया) के प्रमुखों की बैठक से संबंधित होगा। इन नेताओं के बीच सितंबर, 2021 में होनेवाली बैठक को लेकर दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है। भारत व अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी क्वाड से जुड़े मुद्दे काफी अहम रहने वाले हैं।

सूत्रों के अनुसार अब दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क का सिलसिला जारी रहेगा। ब्लिंकन के भारत दौरे के बाद बाद अमेरिकी सेना के स्पेशल आपरेशंस कमांड के कमांडर जनरल रिचर्ड डी क्लार्क भारत आ रहे हैं। इसके बाद अगस्त के पहले हफ्ते में अमेरिकी सेना प्रमुख जेम्स मैककोन विले भी भारत आएंगे। इन तीनों शीर्ष अधिकारियों की यात्राओं से दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी टू प्लस टू (रक्षा व विदेश मंत्रियों की) वार्ता की जमीन तैयार होगी।

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