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केंद्रीय मंत्री ने कहा- एनपीआर की कवायद में सूचना सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं

नई दिल्ली, प्रेट्र। गैर-भाजपा शासित कुछ राज्यों के कड़े विरोध के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की कवायद में सूचना सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है, बल्कि स्वैच्छिक है।

एनपीआर पहली बार 2010 में संप्रग सरकार द्वारा शुरू किया गया था

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि एनपीआर पहली बार 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार द्वारा शुरू किया गया था और यह एक संवैधानिक दायित्व है।

एनपीआर में सूचना सार्वजनिक करना स्वैच्छिक है

गृह राज्यमंत्री ने कहा, 'एनपीआर में सूचना सार्वजनिक करना स्वैच्छिक है।' रेड्डी ने कहा कि एनपीआर एक संवैधानिक दायित्व है, राज्यों को इस पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए।

केंद्र सरकार एनपीआर पर राज्य सरकारों को करेगी जागरूक

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एनपीआर के विभिन्न पहलुओं के बारे में राज्य सरकारों को जागरूक करेगी। एनपीआर की कवायद एक अप्रैल से 30 सितंबर 2020 के बीच की जाएगी।

क्या है NPR और मुखिया को क्यों देने होंगे 31 सवालों के जवाब

नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) में पहले मकानों की गिनती होगी, उसके बाद इंसानों की। मकानों की गिनती में घर के मुखिया को एक, दो या तीन नहीं बल्कि 31 सवालों के जवाब देने होंगे। मुखिया को मकान नंबर, मकान की हालत, भोजन में प्रयोग किए जाने वाले प्रमुख अनाज, स्वामित्व की स्थिति, पेजयल, रसोई, शौचालय, ईंधन, प्रकाश और गंदे पानी की निकासी समेत 31 सवालों का जवाब देना होगा। इसके बाद ही मुखिया का मकान एनपीआर में दर्ज होगा।

जानें क्या है NPR, एनआरसी और एनपीआर में अंतर

नागरिकता संशोधन कानून पर मचे घमासान के बाद केंद्र की मोदी सरकार अब नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर लाने की तैयार कर रही है। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी राष्ट्रीय जनगणना रजिस्ट्रर एनपीआर के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। इसमें देश के हर नागरिक की जानकारी दर्ज होगी।

एनपीआर हर दस साल में होने वाली जनगणना का हिस्सा है। देश के सभी निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना एनपीआर का मुख्य उद्देश्य है। इस डाटा में जनसंख्या के आंकड़ों के साथ ही भारत के हर ना‍गरिक की बायोमीट्रिक जानकारी भी दर्ज होगी। आधार कार्ड की तरह ही इस बार एनपीआर में भी आंखों की रैटिना और फिंगर प्रिंट भी लिए जाएंगे।

एनपीआर का फायदा

सरकार के पास देश में रहने वाले हर निवासी की जानकारी होगी। एनपीआर का उद्देश्य लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है।

एनपीआर की मनमोहन सिंह सरकार ने शुरू की थी योजना

साल 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में एनपीआर तैयार करने की योजना की शुरुआत हुई थी। 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब फिर 2021 में जनगणना होनी है। ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है।

एनपीआर और एनआरसी में अंतर

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में काफी अंतर है। एनपीआर का नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है। एनआरसी का उद्देश्य जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान करना है, वहीं 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को एनपीआर में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है। बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में 6 महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर में दर्ज होना है।  देश के हर नागरिक के लिए एनपीआर में अपना नाम दर्ज कराना जरूरी होगा। एनपीआर में ऐसे लोगों का रिकॉर्ड होगा, जो किसी इलाके में 6 महीने से रह रहे हों। हर नागरिक के लिए रजिस्टर में नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

18 मई से होगी गिनती

यह गिनती 18 मई से 30 जून तक चलेगी। गिनती पूरी हो जाने के बाद लोगों की गिनती का कार्य शुरू किया जाएगा। 

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