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सिब्बल ने CAA-NRC पर शाह की जवाबी बहस की चुनौती स्वीकारी, कहा- सरकार ने बोले हैं नौ झूठ

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर बहस की गृहमंत्री अमित शाह की चुनौती को स्वीकार करते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाबी पलवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से खुली बहस की ताल ठोकते हुए आरोप लगाया कि सरकार सीएए-एनआरसी-एनपीआर पर लगातार झूठ बोल रही है। सरकार के नौ झूठ बोलने का दावा करते हुए सिब्बल ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं सीएए-एनआरसी के तहत धर्म से इतर सभी समुदायों के गरीब लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किल होगी और इसीलिए लोगों में इसको लेकर भय है।

सिब्बल ने मोदी-अमित शाह को दी सीएए-एनआरसी पर बहस की चुनौती

गृहमंत्री की लखनऊ रैली में राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव को सीएए-एनआरसी पर खुली बहस की दी गई चुनौती का जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री-गृहमंत्री दोनों को वे ऐसी बहस की चुनौती देते हैं। इस बहस के नियम कायदे आमने-सामने उसी समय तय हो जाएं। इस बहस में सरकार के सीएए-एनआरसी पर फैलाए जा रहे सारे असत्य को वे ध्वस्त कर देंगे।

सिब्बल ने कहा- संविधान और कानून में धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान ही नहीं है

सिब्बल ने कहा कि सरकार का पहला झूठ यह है कि सीएए भेदभावकारी नहीं हैं मगर हकीकत यह है कि संविधान और कानून में कहीं भी धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान ही नहीं है। जबकि सीएए को धर्म के आधार पर नागरिकता देने के लिए लाया गया है।

शाह ने एनआरसी लाने का दिया बयान, जबकि पीएम बोले- एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं

दूसरा झूठ बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अमित शाह ने अप्रैल 2019 में और फिर 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में एनआरसी लाने का बयान दिया। प्रधानमंत्री ने दिल्ली की 22 दिसंबर की रैली में एनआरसी पर सरकार में कोई चर्चा नहीं होने का बयान दिया।

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण में पूरे देश में एनआरसी लागू करने की घोषणा की गई

तीसरा झूठ बताते हुए सिब्बल ने कहा कि जून 2019 के संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण में पूरे देश में एनआरसी लागू करने की स्पष्ट घोषणा की गई है।

एनआरसी अभी कानूनी स्वरूप में नहीं

एनआरसी के अभी कानूनी स्वरूप में नहीं होने के सरकार के रुख को उन्होंने चौथा झूठ बताया और कहा कि 2003 में ही वाजपेयी सरकार के समय कानून में हुए संशोधन में इसकी स्पष्टता है।

एनआरसी शुरू करने की घोषणा नहीं करने का सरकार का दावा गलत

कांग्रेस नेता ने कहा कि एनआरसी शुरू करने की घोषणा नहीं करने का सरकार का दावा पांचवा झूठ है क्योंकि जुलाई 2019 में इसकी अधिसूचना जारी कर इसे अप्रैल 2020 से शुरू करने का ऐलान किया गया है।

एनआरसी का एनपीआर से लेना-देना नहीं होने का सरकार का दावा

एनआरसी का एनपीआर से लेना-देना नहीं होने का सरकार का दावा छठा झूठ है क्योंकि गृह मंत्रालय की 2018-19 की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि एनआरसी का पहला कदम एनपीआर है।

किसी भारतीय की नागरिकता नहीं जाएगी सरकार का दावा

सिब्बल ने कहा कि सरकार का यह दावा सातवां झूठ है कि इससे किसी भारतीय की नागरिकता नहीं जाएगी। मगर हकीकत यह भी है कि असम में पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के परिजन और कारगिल जंग के हीरो सनाउल्ला को जिस तरह एनआरसी में विदेशी मान लिया गया। सिब्बल ने कहा कि जब ऐसे लोगों की यह स्थिति है तो आम गरीब के पास तो कोई दस्तावेज ही नहीं होते चाहे वह किसी धर्म का हो और इसीलिए सभी समुदाय के गरीब लोग सीएए-एनआरसी से भय में हैं।

डिटेंशन सेंटर नहीं होने के सरकार का दावा गलत

डिटेंशन सेंटर नहीं होने के सरकार के दावे को आठवां झूठ करार देते हुए उन्होंने कहा कि तथ्य गवाह हैं कि छह ऐसे सेंटर अभी बन चुके हैं।

सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे लोगों पर बल प्रयोग नहीं करने का सरकार का बयान गलत

सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने के सरकार के बयान को नौंवा झूठ बताते हुए सिब्बल ने कहा कि अकेले उत्तरप्रदेश में पुलिस कार्रवाई में 28 लोगों की मौत हो चुकी है।

अमित शाह ने कहा- चाहे जितना विरोध हो, सीएए वापस नहीं होगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) वापस नहीं होगा। लखनऊ में सीएए के समर्थन में आयोजित भाजपा की रैली में माइक संभालते ही शाह ने अपने इरादे जाहिर कर दिए। सीएए का विरोध कर रहे राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को वोट बैंक का लोभी, अंधा और बहरा बताते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्हें करोड़ों शरणार्थियों पर हुए अत्याचार नहीं दिखते। उन्होंने कहा कि सिर्फ सीएए ही नहीं, चाहे सर्जिकल स्ट्राइक रही हो, अनुच्छेद-370 या तीन तलाक का खात्मा या राम मंदिर का निर्माण, देशहित से जुड़े ऐसे सभी मुद्दों का इन विपक्षी नेताओं ने विरोध किया। इन मुद्दों पर वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान की भाषा बोलते रहे हैं। यह लड़ाई देश का भला और देश के टुकड़े करने वालों के बीच है। डंके की चोट पर कहा कि चाहे जितना विरोध हो, सीएए वापस नहीं होने वाला।

अमित शाह ने की शरणार्थियों से मुलाकात

मंच पर चढ़ने से पहले अमित शाह ने रैली स्थल पर आये शरणार्थियों से भी मुलाकात की और उनकी आपबीती सुनी।

विपक्षी दल कर रहे दुष्प्रचार

अमित शाह ने कहा, 'संसद के शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागरिकता अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक लेकर आये तो राहुल बाबा एंड कंपनी, ममता दीदी, अखिलेश यादव और मायावती इसके खिलाफ कांव-कांव करने लगे। नकारे जा चुके विपक्षी दल दुष्प्रचार कर रहे हैं कि सीएए से देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। इसकी आड़ में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा देश में आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा फैला रहे हैं।

शाह ने दी सीएए पर बहस करने की चुनौती

सीएए का विरोध करने वाले इन सभी नेताओं को उन्होंने ललकारा कि यदि इस कानून की कोई भी धारा किसी की नागरिकता ले सकती है तो वह मुझे दिखाइये। उन्हें चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो इस कानून पर बहस करने के लिए सार्वजनिक मंच ढूंढें।

अखिलेश बाबू जेल की सलाखों के पीछे डाल दिये जाओगे

शाह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को जमकर आड़े हाथ लिया। रैली के मंच से सीएए को लेकर उनके ज्ञान पर चुटकी ली। बोले, 'अखिलेश बाबू, आप ज्यादा न बोलो तो अच्छा है। किसी के रटे-रटाये दो वाक्य बोल देते हो। मंच पर सीएए पर पांच मिनट भी बोल सको तो जानें। थोड़ी पढ़ाई-लिखाई भी किया करो। राजनीति में पढ़ना लिखना अच्छा होता है।' तल्ख लहजे में उन्हें चेताया भी, 'अखिलेश बाबू, हमें जितना चाहे गाली दो, हमारी पार्टी को गाली दो, लेकिन भारत मां के खिलाफ नारे लगे तो जेल की सलाखों के पीछे डाल दिये जाओगे।

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