रक्षा मंत्री ने बताया, एलएसी पर कब तक डटे रहेंगे हमारे सेना के जवान, जानें कमांडर्स सम्‍मेलन की बड़ी बातें

राजनाथ सिंह ने बुधवार को सैन्य कमांडरों के चार दिवसीय सम्‍मेलन में चीन को सख्‍त संदेश दिया।
Publish Date:Wed, 28 Oct 2020 08:30 PM (IST) Author: Krishna Bihari Singh

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सैन्य कमांडरों के चार दिवसीय सम्‍मेलन में चीन को सख्‍त संदेश देते हुए कहा कि सेना के जवान एलएसी पर तब तक डटे रहेंगे जबतक कि गतिरोध खत्‍म नहीं हो जाता। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, उन्‍होंने सम्मेलन में एलएसी पर चीन के साथ जारी तनाव की स्थिति पर बात करते हुए स्‍पष्‍ट किया कि सीमा पर भारतीय सेना के जवान तब तक तैनात रहेंगे जब तक कि गतिरोध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत का कोई ठोस हल नहीं निकल जाता।

इससे पहले सैन्‍य स्‍तर की वार्ताओं में भी भारतीय सेना चीन के सामने साफ कर चुकी है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर पूर्व की स्थिति बहाल किए बगैर वह पीछे नहीं हटने वाली है। एएनआइ के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने सम्‍मेलन में कहा कि मैं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने में पुलिस, सुरक्षा बलों और सेना की ओर से अपनाई जा रही रणनीति की सराहना कर रहा हूं। उन्‍होंने आगे कहा कि तीनों बलों के समन्वित प्रयासों के कारण ही कि जम्मू-कश्मीर एक स्थिर और शांतिपूर्ण वातावरण की ओर बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना कमांडरों से कहा कि वे विवादित सीमाओं पर चीन की हरकतों के प्रति चौकस रहें और सैन्य वार्ता के दौरान उसके इरादों के प्रति भी सावधान रहें। रक्षा मंत्री साल में दो बार होने वाली आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। चार दिवसीय इस कांफ्रेंस में इस बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ तनाव विचार-विमर्श का मुख्य मुद्दा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि समाधान तक पहुंचने के लिए वार्ता ईमानदारी और विश्वास के माहौल में होनी चाहिए। 

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि चीन के इरादों पर सवालिया निशान लगने के बाद से दोनों देशों के रिश्‍तों में विश्वास का अभाव हो गया है। मैं वर्तमान सुरक्षा माहौल में भारतीय सेना द्वारा उठाए गए कदमों से बेहद गौरवान्वित हूं। सुधारों की राह पर आगे बढ़ने और सभी क्षेत्रों में लाभप्रद स्थिति हासिल करने में सेना की मदद करने के लिए रक्षा मंत्रालय पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि किसी समाधान तक पहुंचने के लिए वार्ता ईमानदारी और विश्वास के माहौल में होनी चाहिए। 

रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से देश की संप्रभुता और सुरक्षा से तमाम चुनौतियों का भारतीय सेना ने कुशलतापूर्वक समाधान किया है। चाहे वह आतंकवाद की समस्या हो, उग्रवाद या बाहरी आक्रमण, सेना ने सभी खतरों को नाकाम करने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। रक्षामंत्री इस सम्‍मेलन में एलएसी पर भारत की युद्धक तैयारियों के साथ ही जम्मूकश्मीर में स्थिति की व्यापक समीक्षा कर रहे हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में सरकार सेना को मजबूती देने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।

रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर बताया कि मौजूदा हालात में भारतीय सेना द्वारा उठाए गए कदमों पर मुझे बेहद गर्व है। सेना को हर सुविधा देने के लिए रक्षा मंत्रालय प्रतिबद्ध है। उल्‍लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच महीने से भी ज्यादा समय से गतिरोध जारी है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, दोनों पक्षों ने क्षेत्र में 50-50 हजार से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया है। एलएसी पर जारी मौजूदा गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों पक्षों में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।  

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