राजनाथ ने विपक्ष के नेताओं से सदन चलाने में मांगा सहयोग, विपक्ष ने कहा- सरकार उठाए गए मुद्दों पर करे चर्चा

विपक्षी दलों ने सरकार से तीन मुद्दों पर दोनों सदनों में चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष के एजेंडे में तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त करना मुद्रास्फीति में वृद्धि पेट्रोल डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और पेगासस मामला पर चर्चा शामिल है।

Bhupendra SinghMon, 02 Aug 2021 11:45 PM (IST)
सदन चलाने के लिए राजनाथ ने विपक्षी नेताओं से साधा संपर्क

नई दिल्ली, एएनआइ। संसद में हंगामे के कारण बार-बार के स्थगन के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को फोन कर सदन चलाने में उनका सहयोग मांगा है। यह जानकारी सोमवार को सूत्रों ने दी।

सदन चलाने के लिए राजनाथ ने विपक्षी नेताओं से साधा संपर्क

राजनाथ ने राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं से सदन चलाने में मांगा सहयोग, 

सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह, राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं को फोन किया और सदन चलाने में उनका सहयोग मांगा। जिस पर विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए, विपक्ष सरकार को सहयोग देने के लिए तैयार है ।

विपक्षी दलों ने की सरकार से तीन मुद्दों पर दोनों सदनों में चर्चा कराने की मांग

जानकारी के अनुसार विपक्षी दलों ने सरकार से तीन मुद्दों पर दोनों सदनों में चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष के एजेंडे में तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त करना, मुद्रास्फीति में वृद्धि, पेट्रोल डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और प्रधानमंत्री व गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों (पेगासस मामला) पर चर्चा शामिल है। उल्लेखनीय है हाल ही में पीयूष गोयल और प्रह्लाद जोशी ने भी विपक्षी दलों से मुलाकात कर सदन चलाने में सहयोग मांगा था।

चिदंबरम ने कहा- जवाब देने में सरकार को मुश्किल क्यों

पेगासस जासूसी विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को पूछा कि भारत सरकार के लिए सीधा जवाब देना इतना मुश्किल क्यों है कि वह पेगागस साफ्टवेटर मुहैया कराने वाली इजरायली कंपनी एनएसओ समूह की ग्राहक है या नहीं। पूर्व गृह मंत्री ने दावा किया कि एनएसओ समूह में दुनिया की 40 सरकारें और 60 एजेंसियां इसकी ग्राहक हैं।

आसान सा सवाल- क्या भारत सरकार चालीस में से एक थी

उन्होंने कहा कि यह एक आसान सा सवाल है कि क्या भारत सरकार चालीस में से एक थी। भारत सरकार के लिए इस आसान सवाल का सीधा जवाब देना इतना कठिन क्यों है।

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