लोकसभा में उठे कोलेजियम प्रणाली पर सवाल, सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व जजों के एक निश्चित उम्र में पहुंचने पर अतिरिक्त पेंशन के मामले में स्पष्टीकरण के लिए पेश दो संशोधन विधेयकों पर कुछ सदस्यों ने हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति आयु भी सुप्रीम कोर्ट जजों के समान 65 वर्ष करने की मांग की।

Monika MinalTue, 07 Dec 2021 11:37 PM (IST)
लोकसभा में उठे कोलेजियम प्रणाली पर सवाल, सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग

नई दिल्ली, प्रेट्र।  लोकसभा सदस्यों ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टो में जजों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली पर सरकार से पुनर्विचार करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों और न्यायपालिका में रिक्तियों की बड़ी संख्या पर चिंता व्यक्त की।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व जजों के एक निश्चित उम्र में पहुंचने पर अतिरिक्त पेंशन के मामले में स्पष्टीकरण के लिए पेश दो संशोधन विधेयकों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कुछ सदस्यों ने हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति आयु भी सुप्रीम कोर्ट जजों के समान 65 वर्ष करने की मांग की। अभी हाई कोर्ट जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। कानून मंत्री किरण रिजिजू बुधवार को चर्चा का जवाब दे सकते हैं।

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य शशि थरूर ने अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका की संवेदनहीनता के कई उदाहरण हैं जिनमें कोरोना काल में प्रवासी कामगारों की मुश्किलों को लेकर कई याचिकाओं का खारिज होना शामिल है। बीजद के पिनाकी मिश्र ने कहा कि कुछ बदलावों के साथ राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) गठित करने का विधेयक फिर लाया जाना चाहिए। पूर्व कानून राज्यमंत्री और भाजपा सदस्य पीपी चौधरी ने कहा, 'मैं सरकार से कोलेजियम प्रणाली पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूं.. और अनुच्छेद-124 की मूल भावना और उद्देश्य को बहाल करने की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि 1993 से पहले जब जजों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा की जाती थी, कोई नहीं कह सकता कि उन्होंने खराब फैसले सुनाए।

चौधरी ने आगे कहा, 'हमारे यहां संसदीय लोकतंत्र है और सभी मंत्री जवाबदेह हैं। लेकिन कानून मंत्री को जवाबदेह ठहराना बेहद कठिन है क्योंकि हाई कोर्टो और सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिक्तियों को भरने में उनकी कोई भूमिका नहीं होती।' उन्होंने आइएएस और आइपीएस की तर्ज पर अधीनस्थ अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की पैरवी भी की। तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि कोलेजियम एक प्रशासनिक कदम है और उन्हें हर प्रशासनिक कदम की आलोचना करने का अधिकार है। वाईएसआर कांग्रेस की गीता विश्वनाथ ने भी कोलेजियम के स्थान पर एनजेएसी व्यवस्था का समर्थन किया। जदयू और बीजद के सदस्यों ने भी कोलेजियम प्रणाली की आलोचना की।

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