कैप्टन से पंजाब की कप्तानी छीनने में पीके की सर्वे रिपोर्ट ने भी निभाई भूमिका, जानें क्‍या है इनसाइड स्‍टोरी

कैप्टन अमरिंदर सिंह से सूबे की सत्ता की कप्तानी छीनने में सबसे निर्णायक भूमिका कुछ समय पहले तक उनके ही सलाहकार रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की है। पीके की टीम ने बीते कुछ दिनों के दौरान तीन सर्वे रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को दी है।

Krishna Bihari SinghSun, 19 Sep 2021 07:12 PM (IST)
अमरिंदर सिंह से सत्ता की कप्तानी छीनने में निर्णायक भूमिका चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की है।

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की घेरेबंदी के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से सूबे की सत्ता की कप्तानी छीनने में सबसे निर्णायक भूमिका कुछ समय पहले तक उनके ही सलाहकार रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की है। समझा जाता है कि पंजाब के सियासी मिजाज का आकलन कर पीके की टीम ने पिछले कुछ समय के दौरान तीन अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को दी।

सिद्धू के कंधे का हुआ इस्‍तेमाल

इन रिपोर्ट में अगले विधानसभा चुनाव में कैप्टन के चेहरा रहते पार्टी को मिलने वाली चुनौतियों के मद्देनजर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने सिद्धू के जरिये कैप्टन के खिलाफ विरोध को उस मुकाम तक पहुंचा दिया जहां अमरिंदर को इस्तीफा देने को बाध्य होना पड़ा।

कैप्‍टन के खिलाफ नाराजगी

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस हाईकमान ने पिछले कुछ महीनों के दौरान अलग-अलग अंतराल के दौरान कैप्टन सरकार के प्रदर्शन से लेकर पार्टी की चुनावी संभावनाओं का आकलन कराया। पंजाब कांग्रेस की उठापटक के दूसरे चरण में सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी एक सर्वे हुआ और इसमें भी प्रशांत किशोर की टीम ने कमोबेश यही रिपोर्ट दी कि कैप्टन के खिलाफ एक बड़े वर्ग में जमीनी स्तर पर नाराजगी है।

यह बताई गई वजह

सर्वे रिपोर्टों में कैप्टन के राजशी अंदाज के कारण लोगों से बनी दूरी को भी एक वजह बताया गया है। साथ ही सर्वे का यह आकलन भी था कि अमरिंदर को हटाकर किसी नए व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना कांग्रेस अगले चुनाव में इस नाराजगी को थाम सकती है।

प्रशांत किशोर के साथ मंथन

समझा जाता है कि इन रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने प्रशांत किशोर के साथ बैठक कर इस पर विस्तृत चर्चा की और इस दौरान प्रियंका भी मौजूद थीं। इसी के बाद राहुल और प्रियंका ने कैप्टन की विदाई का इरादा तय कर लिया और इस लिहाज से पीके की जमीनी हालात की सर्वे रिपोर्ट ने कैप्टन की मुख्यमंत्री के रूप में पारी खत्म करने की पिच तैयार कर दी।

सियासी घेरेबंदी की अचूक फिल्‍ड‍िंग

कैप्टन विरोधी सियासत को आगे बढ़ा रहे सिद्धू ने भी नेतृत्व से मिले इशारों के मद्देनजर विधायकों को कैप्टन के खिलाफ तैयार करने और हस्ताक्षर अभियान चलाने का मोर्चा संभाला। सिद्धू ने विधायकों को जुटाने के लिए सियासी घेरेबंदी की ऐसी फील्डिंग सजाई कि कैप्टन ने खुद ही इस्तीफा दे दिया।

कैप्‍टन की चुनावी रणनीति में रहे शामिल

दिलचस्प यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने ही कैप्टन की चुनावी रणनीति का संचालन किया था और कांग्रेस की जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। इसके बाद से ही कैप्टन पीके को अपना दोस्त जैसे मानने लगे थे और दोनों के बीच काफी मधुर रिश्ते भी थे। प्रशांत किशोर को कैबिनेट रैंक देकर कैप्टन ने अपना सलाहकार भी नियुक्त किया। हालांकि कांग्रेस में शामिल होने की शुरू हुई चर्चाओं और कैप्टन के खिलाफ सिद्धू के सियासी अभियान के बीच कुछ समय पहले ही पीके ने सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था।

यह भी पढ़ें- कांग्रेस ने पंजाब में चन्नी के सहारे चला बड़ा दांव, जानें इस फैसले के पीछे क्‍या हैं सियासी मायने

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.