यूपी में चुनावी एजेंडा सेट करने में कांग्रेस को आगे रखने पर प्रियंका गांधी वाड्रा का फोकस

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मुख्य चुनावी लड़ाई में लाने के लिए प्रदेश की प्रभारी पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की पूरी कोशिश सियासी नैरेटिव बनाने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। कांग्रेस के लिए 2022 के चुनावी मुकाबले का एक गंभीर प्लेयर होने का संदेश देना बड़ी चुनौती है।

Arun Kumar SinghTue, 19 Oct 2021 09:24 PM (IST)
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देने का एलान पार्टी की रणनीति का हिस्सा

नई दिल्ली, संजय मिश्र। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मुख्य चुनावी लड़ाई में लाने के लिए प्रदेश की प्रभारी पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की पूरी कोशिश सियासी नैरेटिव बनाने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। सूबे की सियासत में बीते तीन दशक से लगातार संघर्ष कर रही कांग्रेस के लिए 2022 के चुनावी मुकाबले का एक गंभीर प्लेयर होने का संदेश देना बड़ी चुनौती है। इस सियासी चुनौती में राजनीतिक एजेंडा सेट करने का शुरुआती दांव कांग्रेस के लिए मददगार साबित होता दिख रहा है। इसलिए प्रियंका का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सियासी विमर्श के केंद्र में रखने पर है और अगले विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का बड़ा एलान इसी रणनीति का हिस्सा है।

आधी आबादी की सीधी सियासी भागीदारी बनेगा बड़ा मुद्दा

कांग्रेस के इस एलान से चुनावी मुकाबले की जमीन पर कितना असर पड़ेगा यह तो राजनीतिक दलों के टिकट बंटवारे के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इतना तो जरूर तय हो गया है कि उत्तर प्रदेश के अगले चुनाव में आधी आबादी की सीधी सियासी भागीदारी एक बड़ा मुद्दा होगा।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरियों का हवाला देते हुए उसकी विरोधी पार्टियां चाहे इस एलान को खारिज करने की कोशिश करें, लेकिन इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती कि प्रियंका के एलान को लेकर सूबे की आधी आबादी के बीच एक हलचल जरूर होगी। जाहिर तौर पर यह हलचल ही कांग्रेस को सियासी नैरेटिव तय करने वाली मुख्य पार्टियों की दौड़ में शामिल करेगी।

प्रियंका का दांव बढ़ाएगा सपा की परेशानी

उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी के सबसे खराब प्रदर्शन को देखते हुए कांग्रेस के सामने 2022 में चुनौती कहीं ज्यादा बड़ी है और इस स्थिति में सियासी विमर्श के केंद्र में रहने से लेकर एजेंडा सेट करने में विरोधियों से आगे रहना पार्टी की अपरिहार्य जरूरत है। तभी पिछले काफी अर्से से प्रियंका का फोकस सूबे में पार्टी को सियासी विमर्श की होड़ में लाने पर रहा है।

महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देने के बड़े चुनावी एलान से पहले लखीमपुर खीरी घटना के तत्काल बाद ही प्रियंका के आक्रामक तेवरों और गिरफ्तारी ने सूबे के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जहां हलचल पैदा कर दी, वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी तमाम कोशिशों के बावजूद इस मुद्दे के राजनीतिक अभियान में पिछड़ती नजर आई।

पुराने मामले जोर-शोर से उठा रहीं प्रियंका

हाथरस और उन्नाव के दुष्कर्म व हत्या की घटनाएं, सोनभद्र गोलीकांड से लेकर सूबे में पिछले कुछ अर्से के दौरान हुई तमाम बड़ी घटनाओं को लेकर भी प्रियंका ने अपनी सक्रियता से कांग्रेस को चर्चा के केंद्र में रखने का प्रयास किया है। लखनऊ में अपनी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रियंका ने इनका जिक्र कर यह संदेश देने की कोशिश भी की कि सूबे में भाजपा की प्रभुत्ववादी सियासत को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ही जमीन पर लड़ रही है। कांग्रेस को चुनाव तक सियासी विमर्श के केंद्र में रखने की प्रियंका की यह कोशिश इसी तरह जारी रही तो जाहिर तौर भाजपा से ज्यादा सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा की परेशानी और बढ़ेगी।

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