SCO Summit : पीएम मोदी ने कहा- कट्टरता दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत, अफगानिस्तान के हाल के घटनाक्रम ने चुनौती बढ़ाई

शंघाई कोआपरेशन आर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक में भारत क्षेत्रीय सुरक्षा खासकर अफगानिस्तान के राजनीतिक हालात कोरोना महामारी का असर एससीओ के सदस्यों की संख्या बढ़ाने और बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा करेगा। पीएम मोदी आनलाइन मीटिंग को संबोधित करेंगे।

Neel RajputFri, 17 Sep 2021 09:31 AM (IST)
ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हो रही है मीटिंग

नई दिल्ली, एएनआइ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई कोआपरेशन आर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, कट्टरता दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत है और हाल के अफगानिस्तान के घटनाक्रम ने चुनौती को और बढ़ा दिया है। पीएम मोदी ने आनलाइन बैठक को संबोधित करते हुए ईरान को एससीओ का नया सदस्य देश बनने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा, इस साल हम एससीओ की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह खुशी की बात है कि इस शुभ अवसर पर हमारे साथ नए मित्र जुड़ रहे हैं। मैं ईरान का एससीओ के नए सदस्य देश के रूप में स्वागत करता हूं।

पीएम मोदी ने कहा, 'भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदारवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं हैं। एससीओ को इनके बीच एक मजबूत तंत्र विकसित करने के लिए काम करना चाहिए।' यह बैठक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में चल रही है। इसमें भारत के अलावा चीन, रूस, पाकिस्तान और कुछ मध्य एशियाई देश भी शामिल हुए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मीटिंग के लिए दुशांबे में उपस्थित हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और विश्वास के लिए जरूरी है, बल्कि युवाओं का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सेंट्रल एशिया के साथ अपने रिश्ते बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि लैंड लाक्ड सेंट्रल एशियाई देशों को भारत के विशाल बाजार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि कनेक्टिविटी की कोई भी पहल वन-वे स्ट्रीट नहीं हो सकती। आपसी विश्वास सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को कंसल्टिव, पारदर्शी और भागीदारी वाला होना चाहिए। इनमें सभी देशों की टेरीटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान निहित होना चाहिए।

बैठक में पीएम मोदी ने रुपये कार्ड, यूपीआइ और कोविन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, चाहे वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए यूपीआइ और रुपेय कार्ड जैसी तकनीक हों, या कोविड से लड़ाई में हमारे आरोग्य-सेतु और कोविन जैसे डिजिटल प्लेटफार्म्स इन सभी को हमने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ भी साझा किया है।

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