जब मरा बच्चा हुआ जिंदा, झारखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताई पीएम मोदी को कहानी

नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए बेहतर कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एएनएम व मुख्य सेविकाओं से बातचीत की। मोदी ने इस दौरान इन कार्यकर्ताओं की जमकर तारीफ की। मोदी ने कहा कि इस देश का प्रधानमंत्री कह सकता है कि उसके लाख हाथ हैं और ये आप सब हैं।

पीएम मोदी ने कहा 'सरकार का ध्यान पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने पर है। टीकाकरण की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। इससे महिलाओं और बच्चों को खासी मदद मिलेगी। अब तक 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों और 85 लाख से ज्यादा महिलाओं का टीकाकरण कराया गया है।' मोदी ने आगे कहा कि पूर्वी देश की महिलाओं को इस बात की जानकारी है कि किस तरह इंसेफेलाइटिस की बीमारी बढ़ रही है। हमारी सरकार ने इससे निपटने के लिए कई मिशन शुरू किए हैं। 

'हर मां  पर बच्चों को मजबूत करने का जिम्मा'
मोदी ने ये भी कहा 'देश की हर मां पर बच्चों को मजबूत करने का जिम्मा है। पोषण यानी खानपान, टीकाकरण, स्वच्छता। पहले भी इसके बारे में लोग जानते थे लेकिन तब ऐसी कोई योजना नहीं थी। इन तमाम बातों में पहले बहुत अधिक सफलता नहीं मिली। बहुत कम संसाधनों वाले देश भी इस मामले में हम से आगे निकल गए हैं।

बच्चे को 'जिंदा' करने की कहानी
इस दौरान झारखंड के सरायकेला के उर्माल की रहनेवाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मनीता देवी ने एक घटना की जानकारी पीएम मोदी को दी। मनीता ने बताया कि उर्माल में एक बार नवजात शिशु को परिवारवालों ने मृत मान लिया था। जब मनीता ने जिद कर बच्चा अपने हाथ में लिया तो उसकी धड़कनें चल रही थी। तब मनीता ने तुरंत एक पाइप के जरिए बच्चे के नाक और मुंह से पानी निकाला और इसके तुरंत बाद बच्चा रोने लगा। मनीता ने बच्चे की मां मनीषा को उसे अपना दूध पिलाने को कहा। मनीषा और उसके बच्चे को अस्पताल ले जाया गया। मोदी ने आगे कहा कि मिशन इंद्रधनुष से देश में टीकाकरण को दूर-दराज इलाकों में भी बल मिला है वाकई आपने जीवन बचाने का कार्य किया है। मैं देश के उन हजारों-लाखों डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जो बिना कोई फीस लिए, गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहे हैं।

'एनीमिया बड़ी समस्या'
एनीमिया एक बहुत बड़ी समस्या है। देश में काफी संख्या में लोग एनीमिया के शिकार हैं। ये बीमारी आयोडीन और आयरन जैसे तत्वों की कमी से होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आयोडीन युक्त नमक का उपयोग बढ़ा है। अब आप सभी कार्यकर्ताओं को आयोडीन और आयरन युक्त डबल फोर्टिफाइड नमक के इस्तेमाल के लिए लोगों को और जागरूक करना पड़ेगा ताकि एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर किया जा सके।

एनीमिया हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है। सरकार ने तय किया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन गुना किया जाए। एनीमिया मुक्त भारत के इस संकल्प को आप सभी पूरी ताकत से पूरा करने वाले हैं। एनीमिया से मुक्ति का मतलब लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जीवन दान।

मोदी ने कहा कि आपको ये भी जानकारी है कि होम बेस्ड न्यूबोर्न केयर के माध्यम से आप हर वर्ष देश के लगभग सवा करोड़ बच्चों की देखभाल कर रहे हैं। आपकी मेहनत से ये कार्यक्रम सफल हो रहा है, जिसके कारण इसको और विस्तार दिया गया है। अब इसको होम बेस्ड चाइल्ड केयर का नाम दिया गया है। 


'15 महीने में 11 बार बच्चे का हालचाल लें'

मोदी ने कहा कि पहले जन्म के 42 दिन तक आशा वर्कर को 6 बार बच्चे के घर जाना होता था। अब 15 महीने तक 11 बार आपको बच्चे का हालचाल जानना जरूरी है। मुझे विश्वास है कि आपके स्नेह और अपनेपन से एक से एक बेहतरीन नागरिक देश को मिलेंगे। बच्चे की ही नहीं बल्कि प्रसूता माता के स्वास्थ्य की भी आप सभी चिंता कर रहे हैं। सुरक्षित मातृत्व अभियान जो सरकार ने चलाया है उसकी अधिक से अधिक जानकारी आपको लोगों तक पहुचानी है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तोहफा
पीएम नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तोहफा दिया है। पीएम ने मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी का एलान किया। नए मानदेय के मुताबिक, 3000 रुपये पाने वाले कार्यकर्ता को 4500 रुपये, 2200 रुपये पाने वाले को 3500 रुपये दिया जाएगा। वहीं आंगनबाड़ी सहायकों का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 2250 रुपये कर दिया गया है।

इसके अलावा पीएम मोदी ने केंद्र सरकार द्वारा आशा श्रमिकों को दिए जाने वाले इंसेंटिव में दोगुना इजाफा किया है। साथ ही आशा श्रमिकों और उनकी सहायकों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत निशुल्क बीमा कवर दिया जाएगा।

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