सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर विपक्ष झुकने को तैयार नहीं, संसद के बाहर और भीतर किया प्रदर्शन

राज्यसभा में अमर्यादित आचरण के आरोप में निलंबित सांसदों के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर और भीतर दोनों ही जगहों पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

Arun Kumar SinghWed, 01 Dec 2021 09:33 PM (IST)
निलंबित सांसदों के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा

 नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। राज्यसभा में अमर्यादित आचरण के आरोप में निलंबित सांसदों के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर और भीतर दोनों ही जगहों पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है। विपक्षी सांसदों के इस प्रदर्शन में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया और कहा कि तानाशाही के खिलाफ हम गांधीवादी खड़े हैं, झुकेंगे नहीं। इस बीच विपक्षी पार्टियों ने सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर फिर से बैठक की। इसमें आंदोलन को आगे भी इसी तरह से जारी रखने पर जोर दिया। वहीं, निलंबित सांसदों का साफ कहना था कि वह माफी तो नहीं मांगेंगे।

संसद के बाहर और भीतर दोनों ही जगहों पर एकजुट होकर किया प्रदर्शन

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी संसद के हंगामे को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि विपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है। सरकार सदन में चर्चा की अनुमति नहीं दे रही है। विपक्षी सांसदों को भी गलत तरीके से निलंबित किया गया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार तानाशाही की सभी हदें पार कर गई है। यह पहली सरकार है जो न सांसदों की बात सुनना चाहती और न संसद की।

असंसदीय और अलोकतांत्रिक हरकतें कर रहा है विपक्ष

राज्यसभा में तीसरे दिन सभापति एम. वेंकैया नायडू विपक्षी दलों को नसीहतें देते रहे, लेकिन हंगामा कर रहे सदस्यों ने उनकी नहीं सुनी। जबकि सभापति ने निलंबित सदस्यों के अमर्यादित आचरण का विस्तार से एक बार फिर जिक्र किया, जिन्होंने मानसून सत्र के आखिरी दिन सदन में जमकर धमाचौकड़ी की थी। नायडू ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिन लोगों को अपने किए पर पछतावा होना चाहिए वे अब भी जिद पर अड़े हुए हैं। यह उचित नहीं है। सदन के वेल में आना, टेबल पर चढ़ना, कागज फेंकना, मंत्री के हाथ से कागज छीनना और चेयर को चुनौती देने जैसी हरकतें असंसदीय और अलोकतांत्रिक हैं। इस पर भी उन्हें कोई पश्चाताप नहीं है, इस पर हम क्या कर सकते हैं।

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