ओमिक्रोन के खतरे के बीच संसदीय समिति ने टीकों के मूल्यांकन की सिफारिश की, बूस्टर डोज को लेकर की यह अपील

कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर बढ़ती चिंता के बीच संसद की एक समिति ने सरकार से नए वैरिएंट को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा वैक्सीन के प्रभाव का मूल्यांकन करने और बूस्टर डोज की आवश्यकता पर और अधिक शोध करने की सिफारिश की है।

Krishna Bihari SinghSat, 04 Dec 2021 07:56 PM (IST)
संसद की एक समिति ने सरकार से नवैक्सीन के प्रभाव का मूल्यांकन करने की सिफारिश की है।

नई दिल्ली, पीटीआइ। सार्स-सीओवी-2 के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर बढ़ती चिंता के बीच संसद की एक समिति ने सरकार से नए वैरिएंट को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा वैक्सीन के प्रभाव का मूल्यांकन करने और बूस्टर डोज की आवश्यकता पर और अधिक शोध करने की सिफारिश की है। शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली स्वास्थ्य मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने यह भी कहा है कि नए वैरिएंट के प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलने की चिंताओं को भी प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य ढांचों को मजबूत करने की सलाह

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान जानमाल के नुकसान को देखते हुए समिति ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से किए गए सभी उपाय पूरी तरह से अपर्याप्त साबित हुए। इसलिए समिति ने स्वास्थ्य ढांचों को मजबूत करने, पर्याप्त बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आक्सीजन सिलेंडर और आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जांच सुविधाओं को मजबूत करने को कहा

महामारी की तीसरी लहर के मंडराते खतरे को देखते हुए समिति ने कहा है कि सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने में अभी के समय का उपयोग करना चाहिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महामारी की पहली लहर का असर जहां शहरों में अधिक देखा गया, वहीं दूसरी लहर से ग्रामीण क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना जांच की सुविधाओं को विस्तार देने और मजबूत बनाने की नितांत आवश्यकता है। 

इंसाकाग ने दिए ये संकेत

वहीं कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से पैदा हुए नए खतरे और बूस्टर डोज की बढ़ती मांग के बीच देश में भारत में सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक सीक्वेंसिंग कंसोर्टियम (इंसाकाग) ने कहा है कि 40 साल से अधिक उम्र वालों को बूस्टर डोज लगाने पर विचार किया जा सकता है। इंसाकाग ने सुझाव ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने संसद में कहा है कि सरकार बूस्टर डोज लगाने पर कोई भी फैसला विज्ञानियों की सलाह पर करेगी।

40 से अधिक उम्र वालों को बूस्टर डोज पर विचार संभव

इंसाकाग के मुताबिक अभी तक टीका नहीं लगवाने वालों का टीकाकरण और जोखिम वाले समूह के लोगों और 40 वर्ष से अधिक उम्र वालों को बूस्टर डोज देने पर विचार किया जा सकता है। बूस्टर डोज लगाने में अधिक जोखिम और संक्रमितों के करीब रहने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मालूम हो कि इंसाकाग प्रयोगशालाओं का एक राष्ट्रीय समूह है, सरकार ने जिसका कोरोना के जीनोम में आने वाले बदलाव की निगरानी करने के लिए गठन किया था।

जीनोमिक निगरानी होगी अहम

इंसाकाग ने 29 नवंबर की अपनी साप्ताहिक बुलेटिन में यह बात ऐसे समय में कही है जबकि लोकसभा में कोरोना महामारी पर चर्चा के दौरान सदस्यों द्वारा पुरजोर तरीके से बूस्टर डोज की मांग उठाई गई है। इंसाकाग का यह भी कहना है कि देश में ओमिक्रोन की मौजूदगी का समय रहते पता लगाने के लिए जीनोमिक निगरानी अहम होगी, क्योंकि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी उपाय करने में मदद मिलेगी।

जांच में तेजी लाने की भी सिफारिश

कंसोर्टियम ने ओमिक्रोन प्रभावित क्षेत्रों से लोगों के आने-जाने पर नजर रखने, ऐसे क्षेत्रों से आए संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान करने और जांच में तेजी लाने की भी सिफारिश की है। इंसाकाग ने कहा कि सबसे पहले अधिक जोखिम वाले या संक्रमितों के साथ काम करने वाले लोगों को बूस्टर डोज देने पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि मौजूदा वैक्सीन से पैदा हुई निम्न स्तर की एंटीबाडी द्वारा ओमिक्रोन को निष्‍क्रि‍य करने की संभावना नहीं है, हालांकि इससे गंभीर बीमारी का खतरा जरूर कम हो सकता है।

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