Sagarmala Project: काशी से गंगासागर का सफर आसान करेंगे नए एक्सप्रेसवे और हाईवे

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वाराणसी से कोलकाता के बीच जल परिवहन का रास्ता साफ करने के बाद अब केंद्र सरकार काशी और गंगासागर के बीच तीव्र सड़क परिवहन की सुविधा देने पर विचार कर रही है। इसके लिए वाराणसी और कोलकाता को एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है।

इसे भारतमाला के दूसरे चरण के तहत निर्मित किया जाएगा, जिसमें 3000 किलोमीटर एक्सप्रेसवे के निर्माण का इरादा है। यही नहीं, भारतमाला-2 के तहत बाबा भोलेनाथ की नगरी और गुरु गोरखनाथ की धरती गोरखपुर के बीच तीव्र परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इन्हें भी एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जबकि पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी कम होंगी।

सरकार ने देश के आर्थिक केंद्रों को राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से जोड़ने तथा बड़े शहरों में लॉजिस्टिक्स पार्क और रिंग रोड का निर्माण करने के लिए 2017 में भारतमाला परियोजना शुरू की थी। लगभग 5.34 लाख करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना के पहले चरण में कुल करीब 84 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण होना है।

पहले चरण में 2022 तक 44 आर्थिक गलियारों, 28 रिंग रोड और 24 लॉजिस्टिक्स पार्क समेत 35 हजार किमी सड़कें बनाई जानी हैं। इसमें ज्यादातर परियोजनाओं के डीपीआर तैयार हो चुके हैं और अब कांट्रैक्ट अवार्ड किए जा रहे हैं।

भारतमाला के पहले चरण में हाईवे, कारीडोर और रिंग रोड के निर्माण पर ज्यादा जोर है। एक्सप्रेसवे केवल 800 किलोमीटर बनने हैं। परंतु ईस्टर्न और वेस्टर्न एक्सप्रेसवे के पूर्ण और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के आंशिक निर्माण के बाद दिल्ली-एनसीआर के यातायात और पर्यावरण में दिख रहे सुधार को देखते हुए सरकार भारतमाला के दूसरे चरण में एक्सप्रेसवे के लक्ष्य को चार गुना बढ़ाने तथा आर्थिक एवं धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरों को तीव्रगामी एक्सप्रेसवे हाईवे से जोड़ने की इच्छुक है।यही नहीं, इसे एक्सप्रेस रफ्तार से दो वर्ष में (2022-24) ही पूरा भी कर लिया जाएगा। इस दौरान लगभग 49 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा।

भारतमाला के दूसरे चरण में जिन अन्य युगल शहरों को तीव्र एक्सप्रेसवे यातायात से जोड़ने का प्रस्ताव है उनमें इंदौर-मुंबई, बंगलूर-पुणे तथा चेन्नई-त्रिची, शामिल हैं। इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्टें (डीपीआर) तैयार करने के लिए एनएचएआइ ने अभी से परामर्शदाता फर्मों से आवेदन मांगने शुरू कर दिए हैं। ऐसा दूसरे चरण को जल्दी पूरा करने के मकसद से किया जा रह है।

सड़क परियोजनाओं में डीपीआर को अंतिम रूप देने में सर्वाधिक समय लगता है और इस कारण अक्सर समय और लागत बढ़ जाती है। इस पहलू पर इसलिए भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि दूसरे चरण में प्रस्तावित ज्यादातर एक्सप्रेसवे और हाईवे एकदम नए एलाइनमेंट पर बनाए जाने हैं, जिनमें थोड़ी ज्यादा लागत आती है। दूसरे चरण में बनने वाले नए हाईवे वाराणसी-गोरखपुर के अलावा गोरखपुर-बरेली, पटना-राउरकेला और पटना झांसी-रायपुर हाईवे शामिल हैं।

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