NSA अजीत डोभाल के बेटे ने जयराम रमेश पर किया मानहानि का केस, 30 जनवरी को होगी सुनवाई

नई दिल्ली, जेएनएन। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और एक पत्रिका के संपादक और रिपोर्टर पर मानहानि का केस किया है। इस मामले में दिल्ली की कोर्ट अब 30 जनवरी को सुनवाई करेगी। इसमें गवाह के बयान होंगे। 

विवेक डोभाल के अनुसार उनके पिता को टारगेट करने के लिए उनके परिवार के खिलाफ मनी लांड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया दिया, जो जिसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। एक साजिश के तहत पहले पत्रिका में लेख छापा गया और बाद में जयराम रमेश ने प्रेस वार्ता कर इसे आगे बढ़ा दिया।

विवेक डोभाल ने कहा कि जयराम रमेश और पत्रिका की रिपोर्ट में उनके परिवार को 'डी कंपनी' के रूप में पेश किया है, जो संदेहास्पद निवेश और एक तरह से मनी लांड्रिंग के धंधे में लिप्त है। यही नहीं, उनकी हेज फंड की कंपनी को 2016 के नोटबंदी से जोड़कर दिखाया गया। उनके अनुसार उनकी कंपनी में कुल 77 करोड़ रुपये का हेज फंड है, जिसे पांच लोगों ने अपनी वैध कमाई से लगाया था। लेकिन जयराम रमेश ने केमन आइलैंड को टैक्स हैवन बताते हुए नोटबंदी के दौरान वहां से भारत में हुए 8000 करोड़ रुपये के निवेश से उनकी कंपनी को जोड़ दिया।

25 सालों से ब्रिटेन में रह रहे और वहां की नागरिकता हासिल कर चुके विवेक डोभाल के अनुसार उनके पिता ने पूरी जिंदगी देश की सेवा की है और इस तरह के मनगढ़ंत आरोपों से काफी दुखी हैं। नोटबंदी के तीन महीने पहले हेज फंड की कंपनी खोलने के आरोपों को निराधार बताते हुए विवेक डोभाल ने कहा कि दरअसल यह कंपनी 2013 में खोली गई थी और 2015 में इसके लिए फंड जुटा लिया गया था।

अगस्त 2016 में भारत में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 2013 में ही उन्हें नोटबंदी होने की खबर लग गई थी। यही नहीं, भारत में उनकी कंपनी ने केवल छह महीने के लिए निवेश किया था क्योंकि सेबी ने उसपर रोक लगा था। सेबी के नियम के मुताबिक वही हेज फंड निवेश कर सकता है, जिसमें कम-से-कम 25 निवेशक हों, जबकि उनकी कंपनी में केवल पांच निवेशक है। विवेक डोभाल ने कहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियों में फंड मैनेज करने का उनका लंबा अनुभव रहा है और उसी के आधार पर 2013 में उन्होंने अपनी कंपनी बनाई थी।

शौर्य डोभाल से उनकी कंपनी के आरोपों को खारिज करते हुए विवेक डोभाल ने कहा कि कंपनी के पास छोटा सा फंड होने के कारण ज्यादा खर्च करने की स्थिति में नहीं थे। इसी कारण शौर्य डोभाल की कंपनी में दो कर्मचारियों को अपने काम के लिए रखा था और उनका एक लाख 60 हजार रुपये का वेतन हर महीने वे भाई की कंपनी में भेजते थे। विवेक डोभाल ने कहा कि उनके पास एक-एक पैसे के हिसाब है और उसका सबूत है। लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए उनके पिता की छह दशक में कमाई गई इज्जत को तार-तार कर दिया गया।

 

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