Muzaffarpur Shelter Home Case: सजा का एलान टला, अब 12 दिसंबर को आएगा फैसला

नई दिल्ली, अरविंद द्विवेदी। बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिकागृह यौन उत्पीड़न मामले में साकेत कोर्ट द्वारा आज आने वाला फैसला 12 दिसंबर तक के लिए टल गया है। फैसला टलने की वजह वकीलों की हड़ताल को माना जा रहा है। दरअसल, वकीलों और पुलिसकर्मियों में चल रहे तनाव के कारण अभियुक्तों को जेल से कोर्ट परिसर तक लाने में समस्या हो सकती थी। इसलिए अदालत ने 12 दिसंबर की तारीख दे दी है।

साकेत कोर्ट के अंदर अब भी वकील पुलिस को घुसने नहीं दे रहे हैं। जबकि 20 अभियुक्तों को कोर्ट में लाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की आवश्यकता होती। वहीं, कुछ अभियुक्तों के वकील धीरज कुमार सिंह बताया कि हड़ताल के कारण वकीलों ने तय किया था कि वे कोर्ट में पेश नहीं होंगे।

मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 20 लोगों पर पोक्सो समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा चल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। अभियुक्तों में बालिकागृह के कर्मचारी और सामाजिक कल्याण विभाग बिहार के अधिकारी भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर पर पोक्सो व दुष्कर्म समेत कई धाराओं में मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था। पिछले साल जुलाई में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी सहायता प्राप्त बालिकागृह में कई बच्चियों से दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। सभी 20 आरापितों को 23 फरवरी को कड़ी सुरक्षा में दिल्ली लाया गया था।

ये हैं अभियुक्त

ब्रजेश ठाकुर, इंदु कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी, रवि कुमार रोशन, विकास कुमार, दिलीप कुमार वर्मा, विजय कुमार तिवारी, गुड्डू कुमार पटेल, किशन राम उर्फ कृष्णा, रोजी रानी, डॉ. अश्विनी उर्फ आसमानी, विक्की, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह व साइस्ता परवीन उर्फ मधु।

जानिए इस केस से जुड़ी अहम बातें

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बिहार सरकार को फटकार लगाने के साथ मीडिया को भी कवरेज को  लेकर फटकारा था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने टीवी चैनलों और प्रिंट मीडिया में बच्चियों  की तस्वीरें दिखाई पर नाराजगी जाहिर की थी।

फरवरी, 2018 में टाटा इंस्टीट्यूट सोशल साइंस (TISS) की टीम ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह को लेकर अपनी ऑडिट रिपोर्ट बिहार के समाजा कल्याण विभाग को सौंपी थी।

तकरीबन दो महीने बाद 31 मई को TISS की रिपोर्ट के मद्देनजर बालिका गृह को खाली कराने के साथ बच्चियों को पटना और मोकामा के साथ अन्य  बालिका गृह में ट्रांसफर किया गया था। अनियमितता को लेकर FIR में दर्ज की गई थी। फिर मामला बढ़ने पर जुलाई में मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड में CBI ने आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद 28 जुलाई तब हंगामा मचा जब इस मामले में 42 में से 34 बच्चियों से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। जुलाई में ही पटना में एक बच्ची ने अपने बयान में कहा था कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में एक बच्ची की दुष्कर्म के बाद का हत्या कर दी गई थी। इसके बाद मामला राजनीतिक स्तर पर गरमा गया गया था।

 

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