मध्यप्रदेश के मंत्री सारंग ने कहा- नेहरू के लाल किले से भाषण की गलती के कारण देश में बढ़ी महंगाई

मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने महंगाई बढ़ने के लिए 15 अगस्त 1947 को लाल किले की प्राचीर से पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए भाषण को जिम्मेदार बताया है। इसके बाद कांग्रेस नेता इंटरनेट मीडिया पर हमलावर हो गए।

Bhupendra SinghSun, 01 Aug 2021 03:27 AM (IST)
कांग्रेस ने कहा- कोरोना काल में हुई मौतों के लिए भी क्या नेहरू ही जिम्मेदार

भोपाल, स्टेट ब्यूरो। मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने महंगाई बढ़ने के लिए 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए भाषण को जिम्मेदार बताया है। इसके बाद कांग्रेस नेता इंटरनेट मीडिया पर हमलावर हो गए हैं। कांग्रेस-भाजपा समर्थकों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुटीले कमेंट भी किए हैं।

सारंग ने कहा- नेहरू के लाल किले से भाषण की गलती के कारण देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ी

मीडिया से चर्चा में सारंग ने कहा कि देश में महंगाई बढ़ाने का श्रेय नेहरू परिवार को जाता है। महंगाई एक-दो दिन में नहीं बढ़ती। 15 अगस्त 1947 को लाल किले की प्राचीर से जवाहरलाल नेहरू ने जो भाषण दिया था, उसी भाषण की गलती के कारण देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ी है। मोदी सरकार ने तो अर्थव्यवस्था में सुधार किया है।

कांग्रेस ने कहा- कोरोना काल में हुई मौतों के लिए भी क्या नेहरू ही जिम्मेदार

इस पर प्रदेश कांग्रेस महामंत्री (मीडिया) केके मिश्रा ने ट्वीट किया कि शिवराज सरकार के मंत्री ने महंगाई के लिए नेहरू के भाषण को जिम्मेदार ठहरा दिया। यह भी बता दीजिए कि कोरोना काल में हुई मौतों के लिए भी क्या नेहरू ही जिम्मेदार हैं। प्रदेश कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर भी सारंग के बयान का वीडियो अपलोड किया गया है, जिसे कई कांग्रेस नेताओं ने अलग-अलग कमेंट के साथ रिट्वीट किया।

सारंग ने कहा- देश में महंगाई का कारण सिर्फ नेहरू परिवार और कांग्रेस की गलत नीतियां

बाद में सारंग ने कहा कि कांग्रेस के मित्र मुझ पर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि देश में महंगाई का कारण सिर्फ और सिर्फ जवाहरलाल नेहरू परिवार और कांग्रेस की गलत नीतियां थीं।

सारंग ने कहा- यदि नेहरू हिंदू संस्कृति को आगे बढ़ाते तो हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था रहती ठीक

अर्थव्यवस्था की शुरुआत कृषि आधारित होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नेहरू का विलायत की विचारधारा के प्रति आकर्षण था। उन्होंने इस देश की परंपरा को खत्म करने का काम किया। यदि वे हिंदू संस्कृति को आगे बढ़ाते तो शायद हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था ठीक रहती।

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