top menutop menutop menu

विकास के रास्ते में आड़े आ रहे एनपीआर के कुछ सवालों को हटा सकती है मोदी सरकार

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गैर-भाजपा शासित राज्यों के बढ़ते विरोध के बाद सरकार एनपीआर से विवादित सवालों को हटाने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि यदि सभी गैर-कांग्रेसी राज्यों ने एनपीआर के आंकड़े जुटाने से इन्कार कर दिया, तो इसका पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

NPR Meet: गैर-भाजपा शासित राज्यों ने पिता के जन्म-स्थान जैसे सवाल पर सवाल उठाए थे

ध्यान देने की बात है कि जनगणना और एनपीआर पर बैठक के दौरान गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्य सचिवों ने भी पिता के जन्म-स्थान जैसे सवाल के औचित्य पर सवाल उठाया था।

एनपीआर का पूरा उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए आंकड़े जुटाना है

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार एनपीआर का पूरा उद्देश्य गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आंकड़े जुटाना है, ताकि हर जरूरतमंद को उसकी जरूरत के मुताबिक मदद की जा सके, लेकिन यदि कई राज्यों में एनपीआर के आंकड़े नहीं मिलते हैं, तो फिर गरीबों के लिए देशव्यापी कल्याणकारी योजना बनाना और उन्हें जरूरतमंद तक पहुंचाना संभव नहीं होगा।

सरकार एनपीआर में विवादित सवालों को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही

यही नहीं सरकार सिर्फ एनपीआर कराने वाले राज्यों में कल्याणकारी योजना लागू करने का भेदभाव भी नहीं कर सकती है। इससे नुकसान अंतत वंचित गरीबों को ही होगा। यही कारण है कि सरकार एनपीआर में विवादित सवालों को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

माता-पिता का जन्म-स्थान और जन्मतिथि जैसे सवालों पर विपक्ष को आपत्ति

दरअसल, एनपीआर में माता-पिता का जन्म-स्थान और जन्मतिथि जैसे सवालों पर कुछ लोग आपत्ति जता रहे हैं और इसी कारण इसे एनसीआर से जोड़कर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। इसीलिए सीएए और एनसीआर का विरोध करने वाले गैर-भाजपा शासित राज्य एनपीआर के खिलाफ भी खड़े हो रहे हैं।

60 करोड़ गरीबों को लाभ पहुंचाने वाली मोदी सरकार इसे और आगे बढ़ाना चाहती

पिछले शासनकाल में देश के 60 करोड़ गरीबों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने वाली मोदी सरकार मौजूदा कार्यकाल में इन्हें और आगे बढ़ाना चाहती है।

विकास के रास्ते में आड़े आ रहे एनपीआर के कुछ सवालों को हटाने के लिए तैयार

यदि इसके रास्ते में एनपीआर के कुछ सवाल आड़े आ रहे हैं, तो उन्हें हटाने के लिए भी तैयार हो सकती है। सरकार की पूरी कोशिश देश में हर व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक हालात की सटीक जानकारी जुटाना है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.