मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने किया पलटवार, कहा- दिग्विजय की मानसिकता तालिबानी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से दिग्विजय सिंह के उस ट्वीट पर जवाब मांगा गया था जिसमें उन्होंने तालिबान प्रतिनिधि से मिलने दोहा गए भारतीय अधिकारियों के बारे में केंद्र सरकार से वक्तव्य देने की मांग की थी।

Bhupendra SinghWed, 23 Jun 2021 11:23 PM (IST)
दिग्विजय ने दोहा गए भारतीय अधिकारियों के बारे में सरकार से वक्तव्य देने की मांग की थी।

भोपाल, राज्य ब्यूरो। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की मानसिकता को तालिबानी करार दिया है। चौहान बुधवार को मीडिया द्वारा किए गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। चौहान से दिग्विजय सिंह के उस ट्वीट पर जवाब मांगा गया था, जिसमें उन्होंने तालिबान प्रतिनिधि से मिलने दोहा गए भारतीय अधिकारियों के बारे में केंद्र सरकार से वक्तव्य देने की मांग की थी।

कोरोना के खतरे ने युवाओं में बढ़ाया वसीयत का चलन

वे दिन लद गए, जब व्यक्ति उम्र के अंतिम पड़ाव में ही अपनी जायदाद की वसीयत तैयार कराता था। कोरोना ने लोगों को इतना डरा दिया है कि अब 40 से 45 साल की उम्र में लोगों को परिवार की बड़ी जिम्मेदारियों ¨चता सताने लगी है। इस उम्र में ही लोग अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित कर देना चाहते हैं। यही वजह है युवा कारोबारी एवं नौकरी पेशा कई लोग वसीयत बनवाने के लिए वकीलों के पास पहुंच रहे हैं।

कोरोना के कारण जीवन की अनिश्चितता का खौफ

कोरोना के कारण जीवन की अनिश्चितता का खौफ इस कदर बढ़ा है कि पिछले डेढ़ साल में वकील और लॉ फर्मो के पास वसीयत बनवाने वाले लोगों की भीड़ अचानक बढ़ गई है। ये अपनी चल-अचल संपत्ति के वितरण के लिए वसीयत लिखवा रहे हैं, ताकि उनके न रहने पर परिवार को बिना किसी विवाद के आसानी से संपत्ति मिल जाए।

कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में हुई युवाओं की मौत

जिला न्यायालय में अधिवक्ता नरेंद्र कंसाना बताते हैं, कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में युवाओं की भी मृत्यु हुई है, इसलिए बीते दो महीने से 40 से 45 आयु वर्ग के लोग भी वसीयत बनवाने के लिए आने लगे हैं। कई ऐसे भी हैं जिनके पति या पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। उप महानिरीक्षक पंजीयन यूएस वाजपेई ने भी माना कि कोरोना के कारण युवाओं में वसीयत का चलन बढ़ा है। पहले 60-65 साल आयु वर्ग के ऐसे लोग ही वसीयत तैयार कराते थे, जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। ग्वालियर जिले में ही जनवरी 2021 से अभी तक 575 वसीयत पंजीकृत हुई हैं। कोरोना से पहले सालाना 400 पंजीकृत वसीयत हुआ करती थीं।

वसीयत का पंजीयन कराना अनिवार्य नहीं

वसीयत का पंजीयन कराना अनिवार्य नहीं है, इसलिए ज्यादातर लोग सादा कागज पर भी वसीयत बनवाकर अपने घर में रख लेते हैं या अपने किसी विश्वसनीय को दे देते हैं। हालांकि सादा कागज की अपेक्षा पंजीकृत वसीयत को कोर्ट अधिक मान्यता देता है। वसीयत पंजीयन में स्टांप नहीं लगता, कितनी भी संपत्ति हो केवल एक हजार रपये शुल्क लगता है। हर दस्तावेज की तरह वसीयत को पंजीकृत कराने के लिए भी स्लॉट लेना होता है। वसीयत घर में बनी हो या पंजीकृत हो, उसमें दो स्वतंत्र गवाहों का होना अनिवार्य है।

केस-1 :

ग्वालियर निवासी एक युवक दिल्ली में चार्टर्ड अकाउंटेंट है। बीते दिनों उनकी पत्नी का कोरोना के कारण निधन हो गया। इसके बाद वे खुद की ¨जदगी को लेकर भी आशंकित रहने लगे। दो बेटे व एक बेटी के भविष्य की ¨चता सताने लगी। ऐसे में उन्होंने अपनी वसीयत तैयार करवाकर उसे किसी भरोसेमंद को सौंपा। इसके बाद ही नौकरी पर लौटे।

केस-2 :

ग्वालियर के ही एक अन्य युवक ने हाल ही में अपनी चल-अचल संपत्ति की वसीयत कराई है। उनका कहना है एक रिश्तेदार की कोरोना से मृत्यु हो गई। परिवार पर वज्रपात के बावजूद उनके तीन बेटों में महज डेढ़ महीने बाद ही संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया। यह दुखद स्थिति देख मैंने बच्चों में प्रेम बनाए रखने अपनी संपत्ति की वसीयत करा दी।

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.