लोजपा में फूट, लोकसभा सचिवालय पहुंचा मामला; जानें पार्टी पर किसका प्रभुत्व होगा

पशुपति पारस को लोजपा के लोकसभा दल का नेता बनाए जाने के फैसले के खिलाफ चिराग पासवान के पत्र पर सचिवालय कानूनी राय ले रहा है। लेकिन बागी हुए पांचों सदस्यों को कम से कम संसद के अंदर लोजपा के बैनर से बाहर करना फिलहाल मुश्किल हो सकता है।

Arun Kumar SinghThu, 17 Jun 2021 07:48 PM (IST)
लोजपा के नेता पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। पशुपति पारस को लोजपा के लोकसभा दल का नेता बनाए जाने के फैसले के खिलाफ चिराग पासवान के पत्र पर सचिवालय कानूनी राय ले रहा है। लेकिन चिराग के लिए बागी हुए पांचों सदस्यों को कम से कम संसद के अंदर लोजपा के बैनर से बाहर करना फिलहाल मुश्किल हो सकता है। सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सदन को किसी भी दल के अंदर चल रही खींचतान और निष्कासन से कोई मतलब नहीं है। अगर सदन में किसी पार्टी के बहुमत की ओर से कोई आवेदन आता है तो उसे संज्ञान में लिया जाता है। लोजपा के मामले में छह में से पांच सांसदों ने आवेदन दिया।

पशुपति पारस को सदन में लोजपा का नेता माना गया

लोकसभा अध्यक्ष को लोजपा के मुख्य सचेतक ने इसकी जानकारी दी और छानबीन के बाद उस पर स्वीकृति देते हुए पारस को सदन में लोजपा का नेता माना गया। अगर पार्टी ने पांचों को निष्कासित कर भी दिया है तो भी सदन में तो वे लोजपा के ही माने जाएंगे। सूत्र ने कहा कि चिराग ने पार्टी संविधान की बात की है, उस पर भी विचार किया जा रहा है। लेकिन इस पर कब तक फैसला होगा, इस बाबत कोई समय नहीं बताया जा सकता। दरअसल पिछले तीन चार दिनों में चिराग और पारस खेमे की ओर से कई तीर चलाए गए हैं।

पार्टी पर किसका प्रभुत्व होगा, इसका समाधान जल्द होने के आसार नहीं

गुरुवार को पटना में एक नई कार्यकारिणी बुलाकर लोजपा ने पारस को अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी है। दूसरी ओर चिराग के करीबी महासचिव अब्दुल खालिक ने चुनाव आयोग को चिट्ठी भेज दी है। यह भी दावा किया जा रहा है कि पार्टी का कामकाज पार्टी संविधान से बंधा हुआ होता है। उससे परे कोई भी काम वैधानिक नहीं होता।

कार्यकारिणी को आहूत करने का अधिकार केवल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधान महासचिव को

खालिक ने बताया कि कार्यकारिणी को आहूत करने का अधिकार केवल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधान महासचिव को होता है। पारस को ऐसी झूठी और अवैधानिक कार्यकारिणी ने अध्यक्ष चुना है, जिसमें कोई कार्यकारिणी सदस्य नहीं है। अगर पुराने सदस्यों की भी बात की जाए तो उनके पास बमुश्किल आठ सदस्य हैं। वह चाहें तो नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन लोजपा को गलत तरीके से हड़प नहीं सकते।

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