कपिल सिब्बल बोले, देश को चाहिए मजबूत विपक्ष; कांग्रेस में केंद्र और राज्य स्तर पर व्यापक सुधार की जरूरत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत को पुनरुत्थानवादी कांग्रेस की जरूरत है। लेकिन पार्टी को दिखाना होगा कि वह सक्रिय है और लोगों के मुछ्दों से सार्थक रूप से जुड़ने के मूड में है। कांग्रेस को जल्द संगठनात्मक चुनावों की जरूरत है।

Arun Kumar SinghSun, 13 Jun 2021 04:32 PM (IST)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि

नई दिल्ली, प्रेट्र। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि देश को फिर से उठ खड़ी होने वाली कांग्रेस की जरूरत है। इसके लिए पार्टी को यह दिखाने की जरूरत है कि वह अब जड़ता की स्थिति में नहीं है बल्कि वह सक्रिय है, उसकी मौजूदगी है, वह जागरूक है और सार्थक रूप से जुड़ने के मूड में है। एक साक्षात्कार में सिब्बल ने कहा कि इसे संभव बनाने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरों पर संगठन के पदानुक्रम में व्यापक सुधार करने होंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि पार्टी अभी भी एक ताकत है और अब जड़ता की स्थिति में नहीं है।

कहा, देश का वर्तमान मूड पार्टी के उभार के लिए अच्छा अवसर

देशभर में नए सिरे से उभरते राजनीतिक समीकरणों के दौर में पार्टी के फिर से उठ खड़े होने की उम्मीद जताते हुए सिब्बल ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बावजूद देश का वर्तमान मूड उसे देशभर में एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में उभरने का अवसर उपलब्ध कराता है। असम में आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ पार्टी के गठबंधन को 'सुविचारित नहीं' बताते हुए सिब्बल ने कहा कि पार्टी यह समझाने में विफल रही कि अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक सांप्रदायिकता दोनों ही देश के लिए समान रूप से खतरनाक हैं। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए उन्होंने इसे भी एक कारण बताया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी में सुधार लाना पड़ेगा। जब चुनाव की चुनौतियां सामने आएंगी तो सुधार आएगा। केवल कांग्रेस के साथ समस्या नहीं है, बाकी दल भी इससे अछूते नहीं हैं। राजनीतिक दल का केवल एक लक्ष्य रहता है कि किस तरह अगला चुनाव जीता जाए। उसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार हैं। हमारा संवैधानिक ढांचे इतने कमजोर हो चुके हैं कि कोई सत्ता के खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहता। यह देश के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।

उन्होंने कहा कि एक बड़ी पार्टी में बातचीत और आपसी संवाद जरूर होना चाहिए। बिना बातचीत के कोई एजेंडा आगे नहीं बढ़ सकता और सुनने की क्षमता भी होनी चाहिए। लोकतंत्र में अगर सुनने की क्षमता नहीं होगी तो चाहे वह दल हो या लोकतांत्रिक व्यवस्था वे कमजोर हो जाएंगे। जो भी राजनीतिक दल और नेता सुनने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें आगे जाकर नुकसान जरूर होगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस हकीकत को स्वीकार करना होगा कि आज हमारी राजनीतिक विचाराधारा शून्य हो गई है और लोभधारा की राजनीति हो रही है। जो व्यक्ति 20 साल हमारे साथ रहा और भाजपा को गालियां दीं, वह किस आधार पर आज भाजपा को गले लगा रहा है और यह बात जनता को पूछनी चाहिए। मतदाताओं को चाहिए कि ऐसी प्रसाद की राजनीति करने वालों को कभी चुनाव न जीतने दे।

 

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