भारत ने दी चीन और पाक को सख्त चेतावनी, कहा- सीपीईसी भारत की जमीन पर, बंद हो काम

चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की हाल की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में जिस तरह से कश्मीर का जिक्र किया गया है वह भारत को नागवार गुजरा है। भारत ने दोनों देशों को चेतावनी दी है कि वे भारत के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करना बंद करें।

Arun Kumar SinghThu, 29 Jul 2021 09:58 PM (IST)
पीएम नरेंद्र मोदी, इमरान खान और शी जि‍नफिंग

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की हाल की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में जिस तरह से कश्मीर का जिक्र किया गया है, वह भारत को पूरी तरह से नागवार गुजरा है। भारत ने दोनों देशों को सख्त चेतावनी दी है कि वे भारत के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करना बंद करें। गैरकानूनी तरीके से कब्जा किए भारतीय जमीन पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का निर्माण भी बंद करें। सोमवार को बीजिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और चीन के विदेश मंत्री वांग ई के बीच मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू व कश्मीर का जिक्र था।

चीन और पाकिस्तान को अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी बंद करने को कहा

इस बारे में पूछने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत हमेशा की तरह इन देशों के बयान में जम्मू व कश्मीर का जिक्र आने को सिरे से खारिज करता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इस संयुक्त बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का जिक्र किया गया है। हमने हमेशा पाकिस्तान व चीन को कहा है कि तथाकथित सीपीईसी का निर्माण पाकिस्तान की तरफ से गैर कानूनी तरीके से कब्जा की गई भारतीय जमीन पर किया जा रहा है। हम पाकिस्तान की तरफ से कब्जा की गई गैरकानूनी जमीन में यथास्थिति बदलने की कोशिश की कड़ी निंदा करते हैं। हम सभी पक्षों से इस पर किसी भी तरह का काम रोकने की अपील करते हैं।

भारत ने चीन को पहली बार सीपीईसी पर काम रोकने को कहा

यह हाल के दिनों में सीपीईसी के बारे में भारत की तरफ से दिया गया सबसे सख्त बयान है। भारत पहले भी सीपीईसी को लेकर विरोध करता रहा है, लेकिन सीधे तौर पर चीन को इसके लिए पहली बार इस पर काम रोकने को कहा है। राज्यसभा में भी गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर बयान देते हुए जब यह कहा कि दोनों देश पारदर्शी तरीके से ढांचागत विकास करना चाहते हैं तो उनका इशारा सीपीईसी को लेकर ही था।

सीपीईसी पर बुलाई गई पहली बैठक में भारत ने नहीं लिया था हिस्‍सा

सीपीईसी पर चीन की तरफ से पहली बैठक वर्ष 2015 में बुलाई गई थी, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था। कई जानकार मानते हैं कि उसके बाद ही चीन ने भारत को लेकर ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाया। भारत के विरोध के बाद फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय ढांचागत विकास परियोजनाओं में दूसरे देशों की भौगोलिक अखंडता के आदर की बात कही है।

पाक के गैरकानूनी कब्जे को नहीं छिपा सकता

गुलाम कश्मीर में चुनाव भारत ने पाकिस्तान के हिस्से वाले कश्मीर में चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर भी कड़े तेवर दिखाए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने कहा कि भारत की जमीन पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करके वहां चुनाव कराने से पाकिस्तान सच को नहीं छिपा सकता। पाकिस्तान पर इस हिस्से में कई तरह के बदलाव करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि हमने कड़े शब्दों में पाकिस्तान के समक्ष अपनी आपत्तियों को दर्ज कराया है। पाकिस्तान जो कदम उठा रहा है उसका कश्मीर के स्थानीय लोग भी विरोध कर रहे हैं। इस तरह के कदम से न तो गैरकानूनी कब्जे को छिपाया जा सकता है और न ही वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को। पाकिस्तान को भारतीय जमीन पर रहने का कोई हक नहीं है। उसे जल्द से जल्द से इस गैरकानूनी कब्जे को छोड़ना चाहिए।

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