सीएम के लिए उद्धव ठाकरे के नाम पर कांग्रेस-एनसीपी राजी, दूसरे मुद्दों पर चर्चा अभी भी जारी

मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। महाराष्ट्र में नई सरकार बनने के संकेत अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। कांग्रेस और एनसीपी नई सरकार के मुखिया के तौर पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम पर राजी हो गए हैं। कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना को मिलाकर बने नए गठबंधन 'महाविकास आघाड़ी' के शीर्ष नेताओं की शुक्रवार को हुई बैठक के बाद एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने यह घोषणा की।

विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल द्वारा बहुमत के लिए आवश्यक 145 विधायकों की संख्या हासिल नहीं कर पाने के कारण महाराष्ट्र में 12 नवंबर को राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी थी, लेकिन उसके बाद से ही कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना एक नया गठबंधन बनाकर सरकार गठन की तैयारियों में लगे थे। कई चक्र चली बातचीत के बाद शुक्रवार को मुंबई के नेहरू सेंटर में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद 'महाविकास आघाड़ी' की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया।

बैठक के बाद एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने बताया कि सरकार का नेतृत्व शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के हाथ में रहने पर सहमति बन गई है। अन्य सभी मुद्दों पर तीनों दलों के बीच चर्चा जारी है। बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने नाम पर बनी सहमति पर कोई टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि शनिवार को पत्रकारों के सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ मिल जाएंगे। इस बैठक में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्गज नेता अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल और अविनाश पांडे भी शामिल रहे।

पांच साल रहेगा शिवसेना का ही मुख्यमंत्री

शीर्ष नेताओं की बैठक से पहले शुक्रवार को दिन में शिवसेना और कांग्रेस विधायकों की अलग-अलग बैठकें हो चुकी थीं। तीनों दलों की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री कौन और कितनी अवधि के लिए होगा, इसे लेकर रहस्य बरकरार था। लेकिन तीनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद स्पष्ट हो गया कि मुख्यमंत्री पूरे पांच साल शिवसेना का ही होगा। अब देखना यह है कि उद्धव ठाकरे स्वयं यह पद संभालते हैं या अपने पिता शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे की परंपरा को निभाते हुए इस पद पर अपने दल के किसी और नेता को बैठाते हैं।

विस अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस-एनसीपी में खींचतान

सूत्रों के अनुसार, एनसीपी और कांग्रेस दोनों को सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद दिया जा सकता है। इसके अलावा गठबंधन सरकार में अत्यंत महत्वपूर्ण समझे जाने वाले विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस-एनसीपी में अभी भी खींचतान जारी है। माना जा रहा है कि तीनों दलों के राज्यस्तरीय नेताओं की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों की संख्या और मंत्रालयों के बंटवारे पर शनिवार को फैसला हो जाएगा। उसके बाद ही महाविकास आघाड़ी राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा करने जाएगा।

गडकरी ने बताया मौकापरस्ती वाला गठबंधन

एक ओर जहां एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार स्थिर सरकार देने का वादा कर रहे हैं, वहीं सरकार बनाने से चूक चुकी भाजपा के नेता अब भी इसे मौकापरस्ती वाला गठबंधन बताकर इस सरकार के टिकाऊ नहीं होने की बात कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के बीच वैचारिक मतभेद हैं। उनका गठबंधन विचारों और सिद्धांतों की बुनियाद पर नहीं बना है। यह सिर्फ मौकापरस्ती है। इसलिए यह सरकार टिकाऊ नहीं हो सकती।

भाजपा को मिली थीं सबसे ज्यादा सीटें

मालूम हो कि पिछला विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र में दो गठबंधनों के बीच हुआ था। एक गठबंधन के मुख्य दल भाजपा और शिवसेना थे तो दूसरे गठबंधन के मुख्य दल कांग्रेस-एनसीपी। जिसमें भाजपा को सर्वाधिक 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें हासिल हुईं। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना द्वारा ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग करने के कारण भाजपा के साथ उसका गठबंधन टूट गया। शिवसेना नेता चुनाव के पहले से ही यह दावा करते रहे हैं कि वह महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाकर शिवसेना संस्थापक बालासाहब ठाकरे के सपनों को पूरा करेंगे। अब कांग्रेस-एनसीपी के सहयोग से शिवसेना का यह दावा सच साबित होता प्रतीत हो रहा है।

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