पीएम मोदी पर तंज कस घिरे झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, जानें क्या है इसके मायने

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

महामारी के बीच सियासत करने की कोशिश झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भारी पड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कस वह भाजपा ही नहीं अन्य दलों के भी निशाने पर आ गए हैं। कई मुख्यमंत्रियों ने उन्हें एहसास दिलाया है कि यह ओछी राजनीति है।

Arun Kumar SinghSat, 08 May 2021 12:40 PM (IST)

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। महामारी के बीच सियासत करने की कोशिश झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भारी पड़ गई है। मुख्यमंत्रियों से बातचीत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कस वह भाजपा ही नहीं, अन्य दलों के भी निशाने पर आ गए हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें यह एहसास दिलाया है कि यह ओछी राजनीति है। यह वक्त साथ मिलकर कोरोना से लड़ने का है। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड समेत कुछ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपाल से कोरोना के बाबत बात की थी। हेमंत ने ट्वीट कर इसका मजाक उड़ाया और कहा कि मन की बात करने के बजाय काम की बात करते तो अच्छा होता। 

सोरेन ने मुख्यमंत्रियों से प्रधानमंत्री की बात का उड़ाया था मजाक

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन ने हेमंत की इस टिप्पणी पर कहा, 'हमारे आपसी मतभेद जो भी हों, लेकिन इस महामारी के दौरान इस स्तर पर राजनीति करना देश और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाएगा।' मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू समेत कई अन्य नेताओं ने भी हेमंत के विचार और ट्वीट की आलोचना करते हुए कहा कि वह भी लंबे वक्त से मुख्यमंत्री हैं और उनका अनुभव है कि प्रधानमंत्री मोदी बहुत गंभीरता से राज्यों की समस्याओं को सुनते हैं। यह वक्त एकजुट होकर देश को कोरोना से मुक्त कराने का है। 

कांग्रेस शासित राज्यों के किसी मुख्यमंत्री की ओर से कोई बयान नहीं आया, लेकिन कुछ दिन पहले जब मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम की बैठक को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लाइव कर दिया था, तब कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने भी उसे गलत माना था। खुद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी खेद जता दिया था। स्पष्ट है कि उच्च स्तर पर ऐसी बैठकों और बातचीत को लेकर मर्यादा की एक परंपरा रही है। ऐसे में हेमंत के ट्वीट को सिर्फ विपक्षी राजनीति और विपक्ष का मुखर चेहरा के रूप में दिखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इसे बंगाल में ममता बनर्जी की जीत से भी जोड़ा जा रहा है। 

माना जा रहा है कि जिस तरह ममता इस समय मोदी विरोध का मुखर चेहरा बनकर सामने आई हैं, उसमें सोरेन ऐसे बयानों के अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष और मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने भी हेमंत को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हेमंत को संघीय ढांचे की मर्यादा का अहसास ही नहीं है, न ही सामान्य शिष्टाचार की कद्र। कुछ नेता महामारी को अपनी राजनीति चमकाने का जरिया बना रहे हैं। हेमंत भी उसमें शामिल हो गए हैं।

 

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