अयोध्या मामले में फैसले पर बांग्लादेश में फैलाई जा रही फर्जी खबर, भारत ने की कड़ी निंदा

नई दिल्ली, आइएएनएस। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारत को बदनाम करने की साजिश का खुलासा हुआ है। बांग्लादेश की मीडिया में इसे लेकर एक फर्जी खबर चलाई जा रही है। भारत ने इसकी कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह दोनों देशों की संबंध खराब करने की कोशिश है। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट करके कहा, ' जानबूझकर इस तरह की फर्जी और दुर्भावनापूर्ण खबरें फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों की हम निंदा करते हैं। ये लोग समुदायों को विभाजित करने, विद्वेष फैलाने और भारत - बांग्लादेश के लोगों के बीच दोस्ती को कमजोर करने की कोशिश करते हैं।'

क्या है मामला

दरअसल, बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया में एक पत्र बांटा गया। इसमें दावा किया गया कि यह पत्र अयोध्या मामले में फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को लिखा है। इसमें पीएम मोदी ने पांच जजों वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को 'हिंदू राष्ट्र के लिए उनके शानदार योगदान' के लिए बधाई दी है। 

नकली और दुर्भावनापूर्ण

रवीश ने इसे लेकर ढाका में भारतीय उच्चायोग द्वारा ट्वीट की गई एक प्रेस रिलीज को रीट्वीट किया, जिसमें इसको पूरी तरह से नकली और दुर्भावनापूर्ण बताया गया है। 

जानबूझकर नकली और गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है

प्रेस रिलीज में कहा गया कि बांग्लादेश में मीडिया के एक वर्ग ने बताया कि पीएम मोदी ने अयोध्या के फैसले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी। इसका उद्देश्य बांग्लादेश में लोगों को गुमराह करना और सामाजिक भेदभाव पैदा करना है। कुछ लोग सार्वजनिक तौर पर भारत के बारे में गलतफहमी पैदा करने के लिए जानबूझकर नकली और गलत जानकारी प्रसारित कर रहे हैं। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।

9 नवंबर को आया था फैसला

बता दें कि शनिवार 9 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने इस दौरान केंद्र को अगले 3-4 महीने में एक ट्रस्ट बनाने और विवादित जमीन को मंदिर निर्माण के लिए सौंप देने को कहा था। कोर्ट ने इस दौरान अयोध्या में किसी स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन सौंपने के लिए कहा। 

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