भारत की कुछ आर्थिक नीतियों से अमेरिका चिंतित, एंटनी ब्लिंकन ने दर्ज कराई आपत्ति

सूत्रों की मानें तो अमेरिका को जून 2021 में भारत सरकार की तरफ से प्रस्तावित ई-कामर्स नीतियों को लेकर काफी परेशानी हो रही है। इंडो-अमेरिकन चैंबर आफ कामर्स ने भी एक बयान जारी कर ई-कामर्स नीति को द्विपक्षीय कारोबार को हतोत्साहित करने वाला करार दिया था।

Arun Kumar SinghSun, 01 Aug 2021 10:03 PM (IST)
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और विदेश मंत्री एस जयशंकर

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। पिछले हफ्ते भारत के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की यात्रा के दौरान अफगानिस्तान, हिंद प्रशांत, कोरोना महामारी से जुड़े मुद्दों पर हुई बातचीत ही मीडिया में सुर्खियों में छाई रही। लेकिन ब्लिंकन और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों के मौजूदा कारोबारी रिश्तों को लेकर कुछ तल्ख मुद्दे भी उठे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत सरकार की तरफ हाल ही में प्रस्तावित ई-कामर्स नीति को लेकर अपने देश की आपत्तियों को दर्ज कराया। भारत की तरफ से उन्हें आश्वस्त किया गया है कि कारोबार व निवेश से जुड़े मुद्दों का आगामी ट्रेड समझौते में समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच ट्रेड समझौते को लेकर वार्ता शुरू करने की तिथि अभी तय नहीं हुई है।

अमेरिकी निवेश की राह की अड़चनों को हटाने का भी किया आग्रह

ब्लिंकन ने संयुक्त प्रेस वार्ता में ही अपने देश की बात सामने रख दी थी। उन्होंने कहा था कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद अपने कारोबारी रिश्तों को आगे बढ़ाने को लेकर भी हमें सोचना होगा। हमें द्विपक्षीय निवेश व कारोबार को और बढ़ाने की राह में आने वाली अड़चनों को दूर करने पर लगातार काम करना होगा। इस बारे में हमारी बातचीत हुई है। अगर हम कारोबार व निवेश के लिए सही माहौल का निर्माण करते हैं तो हमारे देश की निजी क्षेत्र की कंपनियां साथ-साथ बहुत कुछ हासिल कर सकती हैं।

ब्यूरोक्रेसी के स्तर पर होने वाली अड़चनों को खत्म करें

अमेरिकी विदेश मंत्री की तरफ से सार्वजनिक तौर पर यह मुद्दा उठाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय विदेश मंत्री की तरफ से जारी बयान में द्विपक्षीय कारोबारी रिश्तों पर पूरी तरह से चुप्पी थी। बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से इस बारे में साफ तौर पर प्रश्न पूछने पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। ब्लिंकन के भारत आने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2021 के निवेश माहौल पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें भारत में निवेश के माहौल को बहुत ही चुनौतीपूर्ण बताया गया था। इसमें मोदी सरकार से यह आग्रह भी किया गया था कि वह निवेश की राह की ब्यूरोक्रेसी के स्तर पर होने वाली अड़चनों को खत्म करे। इसमें भारत की आर्थिक नीतियों को स्पष्ट तौर पर संरक्षणवादी करार दिया गया था।

एंटनी ब्लिंकन ने ई-कामर्स नीति को लेकर अपने देश की आपत्तियों को दर्ज कराया

सूत्रों की मानें तो अमेरिका को जून, 2021 में भारत सरकार की तरफ से प्रस्तावित ई-कामर्स नीतियों को लेकर काफी परेशानी हो रही है। इंडो-अमेरिकन चैंबर आफ कामर्स ने भी एक बयान जारी कर ई-कामर्स नीति को द्विपक्षीय कारोबार को हतोत्साहित करने वाला करार दिया था।वैसे भी देखा जाए तो बाइडन के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और कूटनीतिक स्तर पर लगातार विमर्श का दौर चल रहा है। लेकिन कारोबारी रिश्तों को वार्ता में खास अहमियत नहीं मिल रही है।

अक्टूबर 2020 तक दोनों देशों की सरकारों के बीच एक कारोबारी समझौतों को लेकर लगातार बातें होती रही थीं और एक समय यहां तक कहा गया था कि एक मिनी ट्रेड डील पर जल्द ही दोनों देश हस्ताक्षर करेंगे। मई 2021 में वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका की ट्रेड मिनिस्टर (यूएसटीआर) कैथरीन सी टाई से बात हुई थी, लेकिन दोनों तरफ से द्विपक्षीय कारोबारी समझौतों को लेकर गहरी चुप्पी है।

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