संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने मुद्दों पर बहस के लिए मांगा ज्यादा वक्त

 नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। संसद के शीत सत्र में सियासत की गरमी का संकेत देते हुए विपक्षी दलों ने इस बार मुद्दों पर बहस के लिए अधिक समय देने की अपनी मांग रख दी है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी पार्टियों ने साफ कहा कि 17वीं लोकसभा का पहला सत्र सरकार के विधायी एजेंडे के नाम रहा। इसीलिए दूसरे सत्र में जनता से जुड़े अहम सवालों को उठाने के लिए संसद में इस बार अधिक समय तय किया जाना चाहिए।विपक्षी दलों ने संसद में बहस के लिए अधिक समय की मांग के साथ ही इसमें उठाए जाने वाले मुद्दों की फेहरिस्त भी सरकार के सामने रख दी है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि आज शाम पार्टी लाइनों पर नेताओं और सांसदों के साथ एक अद्भुत बातचीत हुई। हम एक विशेष परिणाम देने वाले संसद सत्र के लिए तत्पर हैं, जहां लोगों के केंद्रित और विकास उन्मुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। 

आर्थिक मंदी और बढ़ती बेरोजगारी के साथ किसानों की बदहाली इसमें जहां कांग्रेस का प्रमुख मुद्दा है। वहीं अब एनडीए से विपक्षी खेमे में बैठने जा रही शिवसेना ने भी इन मुद्दों पर सरकार को संसद के पटल पर घेरने के अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।

वहीं तृणमूल कांग्रेस राज्यपाल के हस्तक्षेप से संघीय ढांचे पर प्रहार के सवाल को उठाने को तैयार है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि राज्यपाल जगदीप धनकड़ जिले का दौरा कर समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे में राज्यपाल पद के दुरूपयोग का सवाल अहम है। स्पीकर ओम बिरला की बुलाई सर्वदलीय बैठक में इन मुद्दों का उठाने का जिक्र कर विपक्षी दलों ने कहा कि बेशक संसद सत्र को चलाने में वे अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं। इसीलिए विपक्षी दल चाहते हैं कि शीत सत्र में जनता की जिंदगी को परेशान करने वाले इन मुद्दों पर संसद में खुली बहस के लिए ज्यादा वक्त तय किया जाए। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि सरकार के विधायी कामकाज और अहम मुद्दों पर बहस के समय का निर्धारण संतुलित होना चाहिए।

नई लोकसभा के पहले सत्र में सरकार के विधायी एजेंडे को अधिकतम समय दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्पीकर की सर्वदलीय बैठक में अंतिम कुछ मिनटों के लिए शामिल हुए मगर पीएम ने इस दौरान कोई टिप्पणी नहीं की। विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से कहा कि बिल पेश करने से पहले परिपाटी के हिसाब से कम से कम दो-तीन दिन पहले सरकार जानकारी दे, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अचानक सदन में बिल लाकर अध्ययन का मौका दिए बिना पारित कराने की बीते सत्र के सत्ता पक्ष के रवैये को विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा।

विपक्षी दलों ने स्पीकर से शून्यकाल और नियम 377 के तहत सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर उचित कदम उठाते हुए तीन महीने में सरकार के जवाब देने के नियम का पालन कराने का भी आग्रह किया। बैठक के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सभी दलों ने संसद में बहस करने और कामकाज सुचारू रुप से चलाने का भरोसा दिया है। सरकार ने भी रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसद चलाने को लेकर सीधी बात होगी।

शीत सत्र में दिलचस्प यह रहेगा कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद भाजपा से अलग हुई शिवसेना अब विपक्षी दलों के सियासी खेमे में होगी। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में तो शिवसेना के सांसदों को विपक्षी खेमे के बेंच में बैठने की जगह तय कर दी गई है। हालांकि लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसदों के बैठने की जगह पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि इस सत्र में सरकार का जोर नागरिकता समेत कई अहम बिल पास कराने पर होगा। वहीं विपक्ष राफेल सौदे की जांच के लिए जेपीसी के गठन व महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा कराने के लिए दबाव बना सकता है। संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा।

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार ने सत्र के लिए कार्यसूची में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को रखा है। मोदी सरकार ने पहले कार्यकाल में इस बिल को संसद में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते यह पारित नहीं हो सका था।

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