चीन की कुटिलता की कहानी, अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए ले रहा अदृश्य हथियारों का सहारा

चीन बखूबी जानता है कि पृथ्वी का सबसे प्रभावशाली देश बनने के उसके लक्ष्य में भारत सबसे बड़ा रोड़ा है। इसलिए वह छल-कपट के सहारे भारत सहित अपने दूसरे दुश्मनों को परास्त करने की साजिश रच रहा है।

Manish PandeySun, 25 Jul 2021 12:09 PM (IST)
चीन, भारत सहित अपने दूसरे दुश्मनों को परास्त करने की साजिश रच रहा है।

[ब्रजबिहारी] चीन पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वह विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। अपने लक्ष्य के आगे मानवीय मूल्यों, नीति और नैतिकता का उसके लिए कोई मोल नहीं है। वह यह भी बखूबी जानता है कि इस पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली देश बनने के उसके इस लक्ष्य में भारत सबसे बड़ा रोड़ा है। इसलिए कुटिल चीन छल-कपट के सहारे भारत सहित अपने दूसरे दुश्मनों को परास्त करने की साजिश रच रहा है। वह दुनिया के बाकी देशों के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है, लेकिन मुश्किल यह है कि परंपरागत हथियारों के बजाय वह अदृश्य हथियारों का सहारा ले रहा है। दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी भी उसका एक हथियार ही है। चीन की इस साजिश के बारे में सब कुछ जानना है तो भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मशहूर लेखक तुहिन ए. सिन्हा और लेखक क्लार्क प्रसाद की ताजा कृति 'मिशन शेंगझान : इंडिया फाइट्स द ड्रैगन' को पढ़ना जरूरी है।

यह उपन्यास एक जासूसी थ्रिलर है। इसकी कथा का विस्तार बहुत व्यापक है और रचना शैली अत्यंत आकर्षक। पाठक एक बार इसे पढ़ना शुरू करेगा तो खत्म किए बिना नहीं रहेगा। पाठकों को बांध कर रखने के सारे तत्व इसमें मौजूद हैं। इसकी गति इतनी तेज है कि पाठक को सोचने का मौका नहीं मिलता है, लेकिन जब वह इसे पढ़ना खत्म करता है तो उसके दिमाग में आशंकाओं के बवंडर चलने लगते हैं। उसके मन में यह स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या एक देश की महत्वाकांक्षा के कारण सचमुच यह दुनिया किसी खतरनाक मुहाने पर खड़ी है।

दुनिया भर में अपनी सत्ता कायम करने के लिए क्या है चीन की साजिश? क्या यह दुनिया निर्दयी चीन के बुने तिकड़म के जाल में फंसकर उसके अधीन हो जाएगी या फिर भारत उसकी इस साजिश की काट ढूंढ़ने और मानवता की रक्षा करने में कामयाब होगा? इन सवालों का जवाब जानने के लिए इस पुस्तक का आस्वादन जरूरी है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए स्पष्ट हो जाता है कि इसे लिखने में काफी श्रम किया गया है। गहरे शोध के बाद ही ऐसी पुस्तकों की रचना संभव है। वर्तमान में घट रही घटनाओं से भविष्य का तानाबाना बुनना आसान काम नहीं है। इसके लिए सिर्फ तर्कशक्ति ही नहीं, बल्कि संतुलित और सुगठित कल्पनाशक्ति की भी जरूरत होती है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि दोनों लेखक इस कसौटी पर खरे उतरे हैं।

इस उपन्यास के चरित्रों में राजनेता, रा एजेंट और अर्थशास्त्री हैं, जो दुनिया को चीन की दुर्दमनीय महत्वाकांक्षा का शिकार होने से बचाने में जुटे हैं। दूसरी तरफ आतंकी और हत्यारे हैं, जो 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रचते हैं, क्योंकि उनके आकाओं को भारत की प्रगति रास नहीं आ रही है। धर्म और अधर्म की इस लड़ाई में जीत हमेशा धर्म की होती है, लेकिन आने वाली पीढिय़ा ऐसी लड़ाइयों की बड़ी कीमत चुकाती हैं। यह डरावना भविष्य सच साबित होगा या फिर इससे बचने की कोई और राह निकलेगी?

अंग्रेजी में देश के बेस्ट सेलिंग लेखकों में शामिल तुहिन ए सिन्हा अब तक 10 पुस्तकें लिख चुके हैं। लेखक के रूप में मशहूर होने से पहले वे टेलीविजन और फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लेखन कर चुके हैं। स्क्रिप्ट लेखक के रूप में उनके अनुभव की छाप इस उपन्यास पर भी स्पष्ट नजर आती है। अगर कोई इस रचना पर फिल्म बनाना चाहे तो उसे स्क्रिप्ट पर ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। फार्मासिस्ट और आइआइएम के ग्रेजुएट क्लार्क प्रसाद 'द बारामुला बांबरÓ लिखकर काफी चर्चित हुए हैं। इसके अलावा वे अमेरिकी चुनाव पर एक पुस्तक की रचना कर चुके हैं और उनकी कई लघु कथाएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

पुस्तक : मिशन शेंगझान : इंडिया फाइट्स द ड्रैगन

लेखक : तुहिन ए सिन्हा और क्लार्क प्रसाद

प्रकाशक : ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन प्रा. लिमिटेड

मूल्य : 599 रुपये

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