जी-7 सम्‍मेलन में पीएम मोदी ने आतंकवाद और आर्थिक दबाव की रणनीति के खिलाफ भरा दम, जानें क्‍या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को डिजिटल माध्‍यम से संबोधित किया। विदेश मंत्रालय ने इस बारे में विस्‍तार से जानकारी देते हुए बताया कि पीएम मोदी ने खुले और लोकतांत्रिक समाजों को एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया।

Krishna Bihari SinghSun, 13 Jun 2021 07:43 PM (IST)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को डिजिटल माध्‍यम से संबोधित किया।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। ब्रिटेन के कार्बिस बे में पिछले दो दिनों से चल रही बैठक में दुनिया के सर्वाधिक विकसित सात देशों के समूह यानी जी-7 ने जहां चीन के बढ़ते दबदबे को चुनौती देने का एक तरह से एलान कर दिया है, वहीं भारत ने कहा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वह उनके साथ है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने नाते भारत जी-7 का स्वाभाविक मित्र देश भी है।

चीन से तनाव के बीच बना अहम साझेदार 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 देशों के साथ विशेष तौर पर आमंत्रित चार अन्य लोकतांत्रिक देशों (भारत, आस्ट्रेलिया, जापान व दक्षिण अफ्रीका) की रविवार को हुई बैठक में अपने देश का पक्ष रखा और भारत को इन देशों के भरोसेमंद साझेदार के तौर पर पेश किया। चीन और जी-7 के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर यह काफी अहम माना जा रहा है।

तीन बार बैठक में हुए शामिल 

पीएम मोदी जी-7 और विशेष आमंत्रित देशों की बैठक में देश में कोरोना की स्थिति की वजह से हिस्सा लेने नहीं जा सके थे। पिछले दो दिनों में उन्होंने तीन दफे इस बैठक में वर्चुअल तरीके से शिरकत की। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (आर्थि‍क संबंध) पी. हरीश ने बताया कि रविवार को पीएम मोदी ने पहले जलवायु परिवर्तन पर और उसके बाद मुक्त समाज पर आयोजित सत्र को संबोधित किया।

प्रमुख वक्‍ता के रूप में दिया भाषण 

मुक्त समाज एवं मुक्त अर्थव्यवस्था यानी ओपन सोसायटीज एंड ओपन इकोनोमीज सत्र में पीएम मोदी एक प्रमुख वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इसमें उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, विचारों की उदारता व स्वतंत्रता के प्रति भारत की पारंपरिक प्रतिबद्धता के बारे में बताया और कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सत्तावादी व्यवस्था, आतंकवाद व हिंसक अतिवाद, गलत सूचना के प्रसार और आर्थि‍क दबाव की रणनीति से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए जी-7 और मेहमान देशों का प्राकृतिक तौर पर मित्र राष्ट्र है।

चीन की तरफ इशारा

कहने की जरूरत नहीं कि पीएम मोदी ने सत्तावादी व्यवस्था और आर्थि‍क दबाव की बात करके पड़ोसी देश चीन की तरफ इशारा किया है। पीएम मोदी के वक्तव्य को कई नेताओं ने सराहा।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी चर्चा

जी-7 की बैठक में कोरोना महामारी के खिलाफ एक वैश्विक रणनीति बनाने के साथ ही दूसरी जिस विषय पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई है वह चीन से ताल्लुक वाली ही है। इस बैठक में हिंद-प्रशांत में बन रही स्थिति पर भी चर्चा हुई है और अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक तौर पर हिंद प्रशांत क्षेत्र को दुनिया के सभी देशों के लिए एक समान अवसर वाला बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही इन देशों ने यह कहा है कि इस उद्देश्य के लिए इस क्षेत्र के दूसरे देशों के साथ साझेदारी व सहयोग किया जाएगा।

सीमा पर तनाव की बात नहीं की 

सनद रहे कि पहले से ही इन 11 देशों में से चार देश (भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया व जापान) इस उद्देश्य से क्वाड गठबंधन के तहत काम कर रहे हैं। कई कूटनीतिक जानकार मान रहे हैं कि क्वाड का विस्तार करके इसमें कुछ दूसरे बड़े लोकतांत्रिक देशों को शामिल करने को लेकर पहले से ही संबंधित देशों में बात चल रही है। वैसे पीएम मोदी ने अपने संबोधन में चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव का मुद्दा नहीं उठाया।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई पर भी वार्ता

बैठक में कोरोना के खिलाफ लड़ाई को लेकर साझी रणनीति पर भी काफी बात हुई है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक यह बात स्पष्ट है कि मानवता के समक्ष पैदा हुई इस चुनौती का सामना करने में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। इन देशों ने वैक्सीन उत्पादन में भारी वृद्धि करने की जो रणनीति बनाने का फैसला किया है उसे पूरा करने में भारत को अहम रोल अदा करना होगा। दुनिया की बड़ी आबादी को वैक्सीन देने का काम भारत के बिना पूरा नहीं हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन पर भारत का पक्ष रखा

पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन पर आयोजित सत्र में भारत सरकार की तरफ से इस संदर्भ में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जी-20 देशों में सिर्फ भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो निर्धारित लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर रहा है। पीएम ने जी-7 देशों को उनके उस वादे की भी याद दिलाई जिसमें हर वर्ष 100 अरब डालर की राशि का सहयोग जलवायु संरक्षण के लिए देने की बात थी। परंतु, इन देशों ने वादा करने के बावजूद इस दिशा में कदम नहीं उठाया है।

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