अमेरिका में खालिस्तानी अलगाववादी समूहों की गतिविधियों से भारत चिंतित, विदेश मंत्रालय ने पाक को ठहराया जिम्‍मेदार

भारत ने अमेरिका में पाकिस्तान समíथत खालिस्तानी अलगाववादी समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियां बढ़ाए जाने की खबरों पर गुरुवार को चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले सप्ताह अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं जिससे पहले भारत ने यह चिंता व्यक्त की है।

Krishna Bihari SinghThu, 16 Sep 2021 11:55 PM (IST)
भारत ने अमेरिका में खालिस्तानी समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियां बढ़ाए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त की।

नई दिल्ली, पीटीआइ। भारत ने अमेरिका में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी अलगाववादी समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियां बढ़ाए जाने की खबरों पर गुरुवार को चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले सप्ताह अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं, जिससे पहले भारत ने यह चिंता व्यक्त की है। खबरें हैं कि प्रधानमंत्री की अमेरिका में वाशिंगटन और न्यूयार्क की यात्रा के दौरान एक प्रतिबंधित खालिस्तानी समूह दोनों शहरों में विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहा है।

बाज नहीं आ रहा पाकिस्‍तान 

इस सिलसिले में जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बागची ने खालिस्तानी समूहों के बारे में एक प्रमुख अमेरिकी थिंक-टैंक हडसन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि कैसे पाकिस्तान अमेरिका से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लगातार प्रयास कर रहा है।

अमेरिका से हुई बात 

बागची ने प्रेस वार्ता में कहा, 'मुझे प्रतिबंधित संगठन के आह्वान के बारे में नहीं पता। मैं उस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। लेकिन हम निश्चित रूप से प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हैं।' उन्होंने कहा, 'हमारी इस मामले में मेजबान देश अमेरिका से बात हुई है और (उसे) इससे अवगत कराया गया है। अगर संगठन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, तो इस तरह की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए।'

गतिरोध खत्म होने पर ही सेनाओं को पीछे हटाने पर विचार संभव

चीन से लगती सीमा पर हालिया स्थिति के बारे में पूछे जाने पर बागची ने कहा कि हमारा रुख वही है कि बाकी बचे इलाकों में गतिरोध खत्म होने से दोनों पक्षों के लिए सेनाओं को पीछे हटाने पर विचार करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, पूर्ण शांति एवं सद्भाव की बहाली सुनिश्चित हो सकती है और द्विपक्षीय रिश्तों में प्रगति संभव हो सकती है। 

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