जी-20 के रोम घोषणापत्र में भारत के सतत विकास के मंत्र को मिली जगह, जानें पीएम मोदी ने शिखर सम्‍मेलन में कौन से मुद्दे उठाए

भारत समेत जी-20 नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि कोविड-19 रोधी टीकों को आपातकालीन इस्‍तेमाल संबंधी मान्‍यता दिए जाने के लिए डब्ल्यूएचओ की फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाना जरूरी है। जानें पीएम मोदी का किन मुद्दों पर रहा जोर...

Krishna Bihari SinghSun, 31 Oct 2021 10:55 PM (IST)
भारत समेत जी-20 नेताओं ने डब्ल्यूएचओ की फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर जोर दिया...

रोम, एजेंसियां। प्रधानमंत्री मोदी समेत जी-20 के नेताओं ने सहमति जताई है कि विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को कोरोना टीकों की आपातकालीन उपयोग मंजूरी को लेकर प्रक्रिया को तेज करने के लिए मजबूत किया जाएगा। 'रोम घोषणापत्र' में सहमति जताई गई है कि कोरोना टीकाकरण दुनिया के लिए फायदेमंद है।भारत के जी-20 शेरपा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को शिखर सम्‍मेलन में हुई चर्चा के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऊर्जा और जलवायु स्पष्ट रूप से हमारी चर्चा का केंद्र रहा। 

भारतीय टीकों को मान्‍यता देने का मुद्दा उठाया

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि G-20 शिखर सम्मेलन में नेताओं ने सहमति जताई कि कोविड रोधी वैक्‍सीन एक वैश्विक संपत्ति है। बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि हर कोई वैक्सीन अप्रूवल के लिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (World Health Organisation, WHO) मजबूत होगा तो वैक्सीन को मान्यता तेजी से मिल सकेगी। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने जोर देकर कहा था कि यह जरूरी है कि डब्ल्यूएचओ जल्द से जल्द भारतीय टीकों को मंजूरी दे।

दुनिया की मदद करने का दिया भरोसा 

पीयूष गोयल ने बताया कि बैठक में सभी नेताओं ने एक सुर में स्वीकार किया कि कोविड महामारी का सामना करना एक बड़ी चुनौती है लेकिन इस लड़ाई में हम सब साथ हैं, हम एक टीम की तरह काम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे विश्व को बताया कि अगले साल हमारा लक्ष्य 500 करोड़ वैक्सीन बनाने का है। भारत ने किफायती वैक्सीन दुनिया को दी हैं जिसका इस्‍तेमाल कम आमदनी वाले देश भी कर सकेंगे। 

जलवायु परिवर्तन पर साझा चिंताओं का जिक्र

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जलवायु परिवर्तन पर विश्व की चिंताओं को उजागर किया गया। विकसित देशों की इसमें जो जि‍म्मेदारी होनी चाहिए उन्हें सामने लाया गया, जो उनकी कमियां रही हैं, उन्होंने उसे स्वीकार किया। जी-20 शिखर सम्‍मेलन में कृषि क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका हमारा केंद्र बिंदु थी। हर कोई सहमत है कि इनकी आजीविका में सुधार एक महत्वपूर्ण वैश्विक प्रयास है, जिसके लिए हमें काम करना होगा।

घोषणापत्र में भारत के सतत विकास के मंत्र को मिली जगह

जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत के शेरपा और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आगे कहा कि सतत जीवनशैली पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मंत्र सतत खपत और जिम्मेदार उत्पादन पैटर्न पर जी-20 का रोम घोषणा में परिलक्षित होता है। गोयल ने कहा, 'पहली बार, जी-20 ने पेरिस में पहले तय किए गए जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वित्त और प्रौद्योगिकी के प्रविधानों के साथ सतत एवं जिम्मेदार खपत एवं उत्पादन की पहचान की है।'

विकासशील देशों के हितों की बात उठाई

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री गोयल ने कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन में सतत विकास बिंदु संख्या 12 पर चर्चा की गई और उसे स्वीकार किया गया। इसका उद्देश्य विकसित देशों को उनकी शानदार और ऊर्जा की गहन खपत वाली जीवनशैली को कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बैठक में ऊर्जा और जलवायु का मुद्दा चर्चा केंद्र में रहा। बैठक में भारत और कई अन्य विकासशील देशों ने विकासशील देशों के हितों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।

जी-20 शिखर सम्मेलन सार्थक : पीएम मोदी

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक पीएम मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन को सार्थक बताया है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, 'रोम में एक सार्थक जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद ग्लासगो के लिए प्रस्थान। शिखर सम्मेलन के दौरान, हम वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श करने में सक्षम हुए, जैसे कि महामारी से लड़ना, स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और नवाचार को आगे बढ़ाना।' जी-20 सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में शामिल होने के लिए ग्लासगो गए हैं। 

क्‍या होता है 'शेरपा'

बता दें कि 'शेरपा' जी-20 के सदस्य देशों के नेताओं का प्रतिनिधि होता है, जो शिखर सम्मेलन के एजेंडे के बीच समन्वय बनाता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह निर्णय लिया गया कि डब्ल्यूएचओ द्वारा सुरक्षित और प्रभावी समझे जाने वाले कोरोना रोधी टीकों की मान्यता को देशों के राष्ट्रीय और गोपनीयता कानूनों के अधीन पारस्परिक रूप से स्वीकार किया जाएगा।

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