सरला परिवार ने सड़क सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

सेवाभावी संगठन सरला परिवार की ओर से आमबगान चौक में सड़क सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

JagranSun, 28 Nov 2021 10:03 PM (IST)
सरला परिवार ने सड़क सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

जागरण संवाददाता, राउरकेला : सेवाभावी संगठन सरला परिवार की ओर से आमबगान चौक में सड़क सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरटीओ, राउरकेला पुलिस के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा इसके प्रति सचेत रहने का अनुरोध किया गया। साथ ही प्लाकार्ड एवं बैनर लेकर जागरूकता रैली भी निकाली गई। सरला परिवार के अध्यक्ष प्रभात कुमार स्वाईं एवं महासचिव रमेश चंद्र सेठी की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा से संबंधित पर्चे बांटे गए एवं प्लाकार्ड लेकर आम बगान चौक में लोगों को जागरूक किया गया। खासकर गाड़ी का लाइसेंस बनवाने, हेलमेट का उपयोग करने, अधिक तेज गति से वाहन नहीं चलाने, मोबाइल से बातचीत करते हुए वाहन नहीं चलाने, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने, गति संबंधित संकेतों का पालन करने, शराब पीकर वाहन नहीं चलाने, सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिग का उपयोग करने का अनुरोध किया गया। ज्योतिर्मयी आचार्य के संचालन में संपन्न इस कार्यक्रम में बाइधर प्रधान, सुशांत राउत, राधाश्याम मल्लिक, प्रशांत मोहन, टिकम नायक, दीपक दास, प्रफुल्ल भोई, प्रसन्न कुमार मजुमदार, संघमित्रा सुतार, अक्षय पंडा, पंचानन परीडा, सुधीर साहू सहित संस्था के अन्य सदस्य शामिल रहे। राउरकेला में जारी है बाल मजदूरी : स्मार्ट सिटी राउरकेला में अब भी बाल मजदूरी खुले आम जारी है। शहर के विभिन्न होटल, ठेला, पड़ा दुकान, शोरूम, रेस्टोरेंट समेत अन्य विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठान व गैरेज में आज भी बाल मजदूर काम करते देखे जा रहे हैं। इसके बावजूद विभाग द्वारा मौन रहना समझ के परे है। जानकारों की माने तो बड़ों को काम पर रखने से अधिक पैसा देना पड़ता है। इस कारण शहर के विभिन्न दुकानदार नाबालिगों को काम पर रखते हैं जिससे उनका काम कम पैसे में निकल जाता है और बच्चों से काम भी अधिक हो जाता है। इस दिशा में सरकारी अधिकारी इन जगहों पर काम करने वाले बाल मजदूरों को ले जाने के साथ इनके परिवार वालों को सौंप देते है। लेकिन इनके परिवार के भरण-पोषण के लिए कोई व्यवस्था नही करते है। इस कारण मजबूरी में इन नाबालिगों को परिवार चलाने के साथ अपना पेट भरने के लिए विभिन्न दुकानों, ठेला और गैरेज में काम करते है। इन बाल मजदूरी करने वाले नाबालिगों के लिए सरकार और जिला प्रशासन की ओर से अलग से काम या किसी प्रकार की योजना बना कर इनको उक्त योजना में शामिल किए जाने की मांग की जा रही है।

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