मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की योजना फेल

सुंदरगढ़ जिले के अपने भवन वाले आंगनबाड़ी केंद्रों को वाला मॉडल में नवीकरण करने की योजना फेल हो गई है।

JagranTue, 26 Oct 2021 08:44 AM (IST)
मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण की योजना फेल

जागरण संवाददाता, राउरकेला : सुंदरगढ़ जिले के अपने भवन वाले आंगनबाड़ी केंद्रों को वाला मॉडल में नवीकरण करने की योजना फेल हो गई है। जिले के 3010 आंगनबाड़ी एवं 799 मिनी आंगनबाड़ी समेत कुल 3809 केंद्र हैं। इनमें से 2530 का अपना भवन है। इन्हें मॉडल केंद्र में तब्दील करने की योजना बनायी गई है। प्रत्येक केंद्र पर इसके लिए 10 लाख रुपये खर्च करने का आकलन किया गया है। पुराने खिड़की दरवाजे बदलने, फर्श पर टाइल्स लगाने, विद्युत तार लगाने, दीवारों में माडल अनुसार चित्र बनाने, शौचालय, रसोई घर बनाने, खेलने के सामान रखने का काम शुरू किया गया। इसके लिए ग्लोबल टेंडर किया गया था पर ठेका संस्था काम करने में नाकाम है। अधिकतर केंद्रों खिड़की दरवाजे निकाल दिए गए हैं। फर्श को तोड़ कर छोड़ दिया गया है जिससे सेवा प्रभावित हो रही है।

जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को अत्याधुनिक सुविधा मुहैया कराने व बच्चों के अनुकूल बनाने के लिए वाला मॉडल की परिकल्पना की गई थी। इसमें सारी सुविधा के लिए काम शुरू किया गया पर ठेका संस्था का इसमें अनुभव नहीं होने के कारण काम रुका पड़ा है। जहां तहां आंगनबाड़ी केंद्रों के खिड़की दरवाजे निकाल कर छोड़ दिया गया है। कहीं फर्श उखड़ा हुआ है तो कहीं दीवारों पर खुदाई की गई है जिससे केंद्र खंडहर जैसे हो गए हैं। दूसरी ओर अत्याधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए वायरिग करने का उल्लेख है पर बिजली कनेक्शन के संबंध में आकलन शामिल नहीं है। जलापूर्ति की व्यवस्था करनी हे पर परिसर में बोरवेल खनन शामिल नहीं किया गया है। बिजली कनेक्शन के बगैर वायरिग पंखा व लाइट का उपयोग संभव नहीं है। वहीं बोरवेल के बगैर पानी की आपूर्ति भी नहीं हो सकती है। ग्लोबल टेंडर के फेल होने के बाद अब कुछ पंचायत समिति को काम करने की जिम्मेदारी दी जा रही है। कई कारणों से पंचायत समिति के द्वारा भी ठीक तरह से इसका काम नहीं किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों का इस्तेमाल शिशु व माता को पौष्टिक आहार देने, विभिन्न प्रतिरोधक टीका, स्वास्थ्य जांच, परामर्श सेवा, विद्यालय शिक्षा, माताओं को पोषण संबंधित प्रशिक्षण सेवा मिलती थी। आंगनबाड़ी केंद्रों के टूटे होने के कारण सारा काम अव्यवस्थित हो गया है। जिले में 1279 केंद्र का अपना भवन नहीं है जबकि 314 खतरनाक हालत में होने के कारण उसका उपयोग नहीं हो रहा है।

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