पहली बार सूखने के कगार पर कारो नदी

कोइड़ा क्षेत्र की खदानों से मिट्टी बहकर सूना और कारो नदी में आकर जमा हो रही है।

JagranThu, 28 Oct 2021 08:09 AM (IST)
पहली बार सूखने के कगार पर कारो नदी

जागरण संवाददाता, राउरकेला : कोइड़ा क्षेत्र की खदानों से मिट्टी बहकर सूना और कारो नदी में आकर जमा हो रही है। कोइड़ा की जीवन रेखा कही जाने वाली कारो नदी में मलबा भरने से इसकी गहराई खत्म हो रही है। इसमें पानी सूखने लगा है। बारिश खत्म होते ही यह तेजी से सूख रही है। गर्मी के दिनों में जल संकट उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है। नदी में पानी नहीं होने से इसका असर भूमिगत जल स्तर पर भी पड़ने लगा है। पहली बार ऐसा हुआ है कि नदी सूख रही है।

कोइड़ा क्षेत्र के खदानों के चलते मिट्टी का कटाव बढ़ने तथा मलबा के बहकर सूना व कारो नदी में आकर जमा हो रहा है। कोइड़ा की जीवन रेखा कही जाने वाली कारो नदी में मलबा भरने से इसमें इसकी गहराई खत्म हो रही है एवं इसमें पानी सूखने लगा है। बारिश खत्म होते ही यह सूख रही है जिससे गर्मी के दिनों में जल संकट उत्पन्न् होने की आशंका बनी हुई है। नदी में पानी नहीं होने से इसका असर भूमिगत जलस्तर पर भी पड़ने लगा है। सूना नदी व कारो नदी का जल भी दूषित हो रहा है। मिट्टी के कटाव एवं नदी में व‌र्ज्य वस्तु डाले जाने से भी यहां यह स्थिति उत्पन्न हो रही है।

कोइड़ा क्षेत्र की पहाड़ियों में लौह अयस्क का खनन तेजी से बढ़ा है। कोइड़ा ब्लाक के डेंगुला पंचायत के राइकेला गांव के मुंडाणी से कारो नदी का उद्गम हुआ है। यह कोइड़ा होकर बड़बिल के बाद झारखंड के गुआ, चिड़िया होकर मनोहरपुर के समीज में कोयल नदी में मिलती है। लौह अयस्क खदानों की व‌र्ज्य वस्तु एवं चूर्ण के चलते इस नदी का पानी हमेशा लाल रहता है। कोइड़ा क्षेत्र में नदी का अधिकतर हिस्सा मलबा से भर गया है एवं नदी का स्रोत अब से ही सूखने लगा है। संयंत्रों के लिए नदी का पानी मोटर के जरिए खींचे जाने से भी नदी सूख रही है। दूसरी ओर फाइंस युक्त कीचड़ के चलते कृषि योग्य जमीन का उपजाऊपन खत्म हो रहा है। हर साल नदी के आसपास के क्षेत्र के खेतों में पानी घुस रहा है एवं फसल की बर्बादी हो रही है। दूषित जल का सेवन करने से मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इस पानी का उपयोग दैनिक जीवन में करना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। नदी के किनारे कमंड में रुंगटा माइंस व कमंड स्टील प्लांट का दूषित व रसायनयुक्त पानी भी सीधे कारो नदी में बहाया जा रहा है इससे भी पानी दूषित हो रहा है। इस पानी से सिचाई का काम भी करना संभव नहीं हो रहा है। पुंडीपोखरी गांव के पास पानी सबसे अधिक दूषित है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सप्ताह भर पहले भाजपा की ओर से नमामि गंगे कार्यक्रम आयोजित किया गया था। राज्य स्तरीय टीम ने कारो नदी क्षेत्र में जाकर निरीक्षण किया व प्रदूषण को लेकर चिता प्रकट की गई थी। नदी के पानी का नमूना संग्रह कर इसे जांच के लिए भुवनेश्वर ले गए हैं। सूना व कारो नदी में गंदा पानी व व‌र्ज्य वस्तु बहाने से पानी के दूषित होने तथा अवैध तरीके से पानी का संयंत्रों में इस्तेमाल करने को लेकर लोगों में जागरूकता आयी है एवं नदी बचाओ आंदोलन के लिए लोग मन बना रहे हैं।

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