बारिश के बावजूद उमड़ा भक्तों का सैलाब, जन्म वेदी से रत्न वेदी रवाना हुए महाप्रभु

पुरी, जेएनएन। महाप्रभु श्री जगन्नाथ बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र एवं सुदर्शन के साथ रविवार को बाहुड़ा यात्रा में भक्तों के जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ जन्म वेदी से रत्न वेदी के लिए रवाना हुए। महाप्रभु की इस बाहुड़ा को देखने के लिए भारी बारिश के बावजूद हजारों भक्तों का समागम श्रीक्षेत्र धाम में नजर आया।

हालांकि एक दिन पहले ही जहां बड़दांड पर घुटने तक पानी भरा हुआ था, मौसम विभाग ने रविवार को भी बारिश की चेतावनी जारी की थी, सब बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए महाप्रभु को रत्न वेदी तक पहुंचाने के लिए भक्तों में उत्साह का माहौल दिखा। पंपिंग सेट लगाकर बड़दांड से पानी को निकाल लिया गया था और रविवार की सुबह से लेकर श्रीक्षेत्र धाम में मौसम भी सुहाना बना रहा। प्रशासन की तरफ से बाहुड़ा यात्रा स्थल से लेकर पूरे श्रीक्षेत्र धाम में चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा।

 

भगवान की बाहुड़ा यात्रा में पूर्व रीति नीति के मुताबिक रविवार को सुबह 9 बजे श्रीसुदर्शन को पहंडी बिजे में लाकर 9:30 बजे देवी सुभद्रा के रथ, दर्पदलन पर विराजमान किया गया। इसके बाद 9:30 बजे प्रभु बलभद्र को पहंडी बिजे में लाया गया। प्रभु बलभद्र के पीछे-पीछे देवी सुभद्रा को 10 बजे पहंडी बिजे में लाकर 10 बजकर 24 मिनट पर दर्पदलन रथ पर विराजमान किया गया।

इसके साथ ही प्रभु बलभद्र को तालध्चज पर रथारूढ़ किया गया। प्रभु बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के पहंडी में आते ही मां सुभद्रा के जयकारों से श्रीक्षेत्र धाम गुंजायमान हो उठा। इसके बाद जगत के नाथ महाप्रभु श्रीजगन्नाथ को 10 बजकर 20 मिनट पर पहड़ी बिजे में लाकर नंदीघोष रथ पर विराजमान किया गया। कालिया ठाकुर के पहंडी बिजे में आते ही जैसे पूरा ब्रह्मंड झूम उठा। हर ओर जय जगन्नाथ का जयघोष गुंजायमान रहा। बड़दांड में लोक नृत्य-गीत के साथ भक्तों, कलाकारों ने कालिया ठाकुर का स्वागत किया। झूमते हुए पहंडी बिजे में नंदीघोष रथ की तरफ बढ़ रहे महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की एक झलक पाने को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई जग के नाथ जगन्नाथ के दर्शन-पूजन को आतुर दिखा।  

श्री विग्रहों का सोना वेश आज

प्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा, सुदर्शन के साथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी रविवार को जन्म वेदी से बाहुड़ा यात्रा में रत्न वेदी के लिए रवाना हुए। भारी बारिश के बावजूद श्रीक्षेत्र धाम में लाखों की संख्या में भक्तों का समागम रथ खींचने एवं रथारूढ़ प्रभु के दर्शन करने को हुआ।  

श्री विग्रहों की पहंडी बिजे संपन्न होने के बाद तीनों रथ पर गजपति महाराज दिव्‍यसिंह देव ने छेरा पहंरा किया। इसके बाद रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू की गई। सबसे पहले प्रभु बलभद्र जी का तालध्वज रथ, इसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और सबसे अंत में महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के नंदीघोष रथ को खींचने की प्रक्रिया हुई। इस दौरान जय जगन्नाथ नयन पथगामी भव तुमे... के जयघोष से बड़दांड गुंजयमान रहा। नृत्य गीत, घंट घंटा की ध्वनि के बीच हजारों की संख्या में भक्तों ने भगवान का रथ खींच श्रीदर्शन किए।

रथयात्रा में श्रीमंदिर के समक्ष पहुंचने के बाद सोमवार को महाप्रभु का सोने के विभिन्न आभूषणों से सुसज्जित किया जाएगा। सोना वेश में सजे श्री विग्रहों को देखने के लिए लाखों की संख्या में भक्तों का समागम होता है। इसे लेकर जिला पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 

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