दिव्यांग बेटी के साथ बरामदे में रहने को मजबूर है वृद्धा

दिव्यांग बेटी के साथ बरामदे में रहने को मजबूर है वृद्धा
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 08:13 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सूत्र, झारसुगुड़ा : केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा गरीबों के उत्थान के लिए कई योजनाएं बनाई जाती है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से उसका सुफल उसके वास्तविक हकदार तक नहीं पहुंच पाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना तथा बीजू पक्का घर योजना के होते हुए भी लखनपुर ब्लॉक अंतर्गत भंवरखोल पंचायत के सागरपाली गांव की 60 वर्षीय असहाय वृद्धा भगवती मुंडा तथा उसकी 34 वर्षीय दिव्यांग पुत्री आशा मुंडा को गांव के अलग-अलग घरों के बरामदे में अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भगवती के पति मृदु मुंडा की 20 वर्ष पूर्व तथा पुत्र महेंद्र मुंडा की 13 वर्ष पूर्व निधन हो जाने के बाद यह परिवार पूरी तरह असहाय हो गया था। मां तथा बेटी जैसे तैसे अपने टूटे फूटे कच्चे घर में जीवन यापन करते थे। दुर्भाग्य से कुछ वर्ष पूर्व भारी बारिश के कारण उसका जर्जर घर भी ढह गया और मां बेटी को गांव वालों के घरों के बरामदे को अपना आसरा बनाना पड़ा। पहले तो भगवती दूसरों के घरों में काम कर लेती थी लेकिन अब स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने से काम भी नही कर पाती है। बेटी आशा को ठीक से सुनाई नही देता है तथा मानसिक रूप से भी वह अस्वस्थ है तथा उसके पास विकलांग प्रमाणपत्र होते हुए भी अब तक उसे भत्ते से वंचित रखा गया है। भगवती ने पक्के घर के लिए भी आवेदन किया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों पर निर्भर है कि उसे घर कब मिल पाता है। इस बाबत गांव के सरपंच अश्विनी प्रधान ने बताया कि भगवती को पक्का घर तथा उसकी बेटी को दिव्यांग भत्ता देने के लिए उनके द्वारा भरसक प्रयास किया जाएगा। कोविड महामारी के चलते इसमें देरी होने की बात कही है।

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