विधायक प्रदीप पाणिग्रही मामला: लोकायुक्त के निर्देश को हाईकोर्ट ने किया खारिज

विधायक प्रदीप पाणिग्रही मामले में लोकायुक्त के निर्देश को हाईकोर्ट ने खारिज किया

विधायक प्रदीप पाणिग्रही मामले में लोकायुक्त के निर्देश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। प्रदीप पाणिग्रही के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप का सबूत है इस बात को लोकायुक्त द्वारा उल्लेख किया गया था उसे भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

Babita KashyapThu, 04 Feb 2021 11:10 AM (IST)

कटक, जागरण संवाददाता। गोपालपुर के विधायक प्रदीप पाणिग्रही मामले में लोकायुक्त के निर्देश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। ऐसे में उनके खिलाफ लाई जाने वाली घोटाले की जांच अब विजिलेंस नहीं कर सकेगी। केवल इतना ही नहीं विधायक प्रदीप पाणिग्रही के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप का सबूत है इस बात को लोकायुक्त द्वारा उल्लेख किया गया था, उसे भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे विधायक पाणिग्रही के खिलाफ विजिलेंस जांच एक तरह से अप्रासंगिक हो गई है। 

गौरतलब है कि 11 दिसम्बर 2020 को विधायक प्रदीप पानीग्रही के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा मामले में ठोस सुबूत होने की बात का उल्लेख लोकायुक्त करने के साथ-साथ विजिलेंस जांच के लिए निर्देश जारी किया था। लोकायुक्त के इस तरह के निर्देश को चुनौती देते हुए विधायक प्रदीप पाणिग्रही हाईकोर्ट में पहुंचे थे। मामले की सुनवाई कर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस.मुरलीधर और न्यायाधीश जस्टिस विश्वनाथ रथ को लेकर गठित खंडपीठ ने बुधवार को यह निर्देश जारी किया है। हालांकि लोकायुक्त की जांच संस्था इस आरोप की जांच कर सकेगी। यह बात खंडपीठ ने निर्देश में स्पष्ट किया है। 60 दिनों के अंदर प्राथमिक रिपोर्ट देने के पश्चात लोकायुक्त इस मामले में आगे बढ़ सकेगी यह बात हाईकोर्ट निर्देश में स्पष्ट किया है। 

 मंगलवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान विधायक प्रदीप पाणिग्रही की ओर से वकील पितांबर आचार्य अदालत को दर्शाए थे कि विजिलेंस डीएसपी रंजन कुमार दास लोकायुक्त के पास कंप्लेंट दायर किए थे। ऐसे में लोकायुक्त विजिलेंस को जांच के लिए निर्देश देना कानूनन स्वीकार योग्य नहीं है। इस मामले में पाणिग्रही को अपना पक्ष रखने के लिए भी लोकायुक्त मौका ना देकर दिसंबर 11 तारीख को विजिलेंस को जांच के लिए निर्देश दिया था। विधायक प्रदीप पाणिग्रही गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में पिछले दिसंबर महीने से है। ऐसे में उन्हें लोकायुक्त  की ओर से उन्हें किसी भी तरह की नोटिस भी नहीं मिली है। उनके खिलाफ होने वाले तमाम आरोप संबंध में भी उन्हें किसी भी तरह से अवगत नहीं किया गया था। 

 लोकायुक्त के निर्देश से पहले और बाद में भी पाणिग्रही को इस मामले में किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया गया था। लोकायुक्त कानून की धारा 20 (3) के तहत पाणिग्रही को पक्ष रखने के लिए मौका ना देकर एक तरफा तौर पर विजिलेंस का आरोप के आधार पर उनके खिलाफ ठोस सुबूत होने के सिद्धांत पर पहुंचना सरासर गैरकानूनी और गैर संवैधानिक है। यह निर्देश लोकायुक्त कानून के विरुद्ध होने की बात अपनी बहस में दर्शाया था आवेदनकारी प्रदीप पाणिग्रही के वकील पितांबर आचार्य ने कहा उन्हें राजनीतिक उद्देश्य के तहत फंसाया गया है और झूठा आरोप लगाया गया है। उनके वकील ने  2020 नवंबर 29 से पहले विधायक पाणिग्रही के खिलाफ किसी भी तरह का मामला ना होने के बात को भी अदालत में दर्शाया था। जिसकी सुनवाई करने के पश्चात हाईकोर्ट ने यह निर्देश जारी किया है।

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