कोरोना के मद्देनजर जेल से रिहा हुए 75 कैदी, पैरोल अवधि 14 दिन से बढ़ाकर 90 दिन बढ़ाई

जेल से रिहा होने वाले कैदियों को घर पहुंचाने की परिवहन व्यवस्था जिला मजिस्ट्रेट, एसपी करेंगे।

सर्वाधिक 7 साल की सजा मामले में 12 सौ कैदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ने का प्रस्ताव। 42 कैदी कोरोना संक्रमित होने की पहचान की गई जबकि 177 कोरोना से स्वस्थ हो चुके। 1129 कैदियों को क्वॉरेंटाइन में रखा। उच्च क्षमता संपन्न कमेटी बैठक से यह बात आई है।

Vijay KumarTue, 11 May 2021 08:31 PM (IST)

 जासं, कटक : कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभी तक 75 विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत पर जेल से रिहा किया है। राज्य के विभिन्न जिलों से यह कैदी पैरोल पर जाएंगे। उच्च क्षमता संपर्ण कमेटी द्वारा यह निर्णय लिया गया है। जल्द ही यह सभी कैदी जेल से रिहा होंगे, लेकिन यह सभी कैदी अपने अपने घर को तय शर्त के अनुसार जाएंगे। जिनमें से एक प्रमुख शर्त है कि नियमित व्यवधान में स्थानीय थाने में हाजिर होंगे। इससे पहले कैदियों को 14 दिनों वाली पैरोल की मंजूरी दी जा रही थी। अभी इस अवधि को बढ़ाकर 90 दिन किया गया है। 42 कैदी कोरोना संक्रमित होने की पहचान की गई हैं जबकि 177 कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं । 1129 कैदियों को क्वॉरेंटाइन में रखा गया है। दूसरी ओर सर्वाधिक 7 साल की सजा भुगतने वाले 12 सौ कैदियों को जमानत पर छोड़ने के लिए प्रस्ताव रखा गया है। इस उच्च क्षमता संपन्न कमेटी की बैठक में हाईकोर्ट के न्यायाधीश व ओड़ीसा राज्य कानून सेवा प्राधिकरण के कार्य पालक अध्यक्षा जस्टिस संजु पंडा की अध्यक्षता में टेलीफोनीक कन्वर्सेशन में चली इस बैठक में राज्य गृह विभाग के मुख्य शासन सचिव संजीव चोपड़ा जेल महानिदेशक (जेल डीजी) संतोष कुमार उपाध्याय प्रमुख मौजूद रहे। 

कमेटी के पास उल्लेख, जेल में 1200 विचाराधीन कैदी

जेल डीजी की ओर से कमेटी के पास पेश की जाने वाली तथ्य में यह उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2020 जनवरी 1 तारीख को राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 17,542 कैदी थे। यह आंकड़ा वर्ष 2021 मार्च 1 तारीख को 19,416 में पहुंची है। सर्वाधिक 7 साल या उससे कम की सजा मामले में गिरफ्तार होकर जेल में करीब 1200 विचाराधीन कैदी हैं। उन्हें अभी जमानत पर छोड़ने के लिए इस बैठक में प्रस्ताव रखा गया। 

सीडीएमओ या जेल के डॉक्टर सबकुछ सुनिश्चित करेंगे

इसके अलावा अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले कैदी, सही समय पर वापस लौटने वाले कैदियों को 30 दिनों का फॉर्लोग यां स्पेशल रेमिसन देने की मुद्दे को विचार में लेने के लिए प्रस्ताव दिए जेल डीजी कमेटी ने कैदियों की सुरक्षा, हाइजीन, चिकित्सा, टीकाकरण आदि के ऊपर भी काफी अहमियत दिया है। अंतरिम जमानत या पैरोल या फॉर्लाग या स्पेशल रेमिसन में छोड़े जाने वाले इन कैदियों को रिहा करने से पहले उनके स्वास्थ्य व्यवस्था संबंध में सीडीएमओ या जेल के डॉक्टर पहले सबकुछ सुनिश्चित करेंगे। 

90 दिनों के पैरोल के लिए जेल निदेशालय से इजाजत

सुप्रीमकोर्ट के अर्नेश कुमार की राय में मिले निर्देश के पालन के लिए कमेटी के अध्यक्ष काफी अहमियत दिया हैं। जेल से रिहा होने वाले कैदियों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था जिला मजिस्ट्रेट, एसपी करेंगे। यह बात भी कमेटी की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट की गई है । संकट की इस घड़ी में अब जेल में रहने वाले करीब 450 कैदियों को 90 दिनों के पैरोल में जाने के लिए जेल निदेशालय की ओर से इजाजत दी गई है। 

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