ओडिआ को झारखंड की दूसरी राजभाषा सूची से हटाये जाने पर राजनीतिक सरगर्मी तेज, विरोधी दलों ने जाहिर की नाराजगी

झारखंड प्रदेश की दूसरी राजभाषा की मान्यता सूची से ओडिआ भाषा को हटाए जाने के प्रसंग ओडिशा में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विरोधी दलों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विरोध जताया है और भाषा की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है

Babita KashyapThu, 30 Sep 2021 11:38 AM (IST)
झारखण्ड में ओडिआ भाषा को दूसरी भाषा की मान्यता वापस लिए जाने का मामला

भुवनेश्वर, शेषनाथ राय। झारखण्ड में ओडिआ भाषा को दूसरी भाषा की मान्यता वापस लिए जाने के प्रसंग को लेकर अब ओडिशा में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस प्रसंग पर एक तरफ जहां विरोधी दल भाजपा, समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और झारखंड में ओडिआ भाषा की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है, तो वहीं दूसरी तरफ ओडिआ भाषा की सुरक्षा के लिए काम करने वाली उत्कल सम्मेलनी की तरफ से कहा गया है कि झारखंड में ओडिआ भाषा अभी भी दूसरी भाषा बनी हुई है, दूसरी भाषा की मान्यता वापस नहीं ली गई है। ओडिशा के राजनीतिक दलों का वक्तव्य आश्चर्यजनक है। वहीं प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा है कि मैं इस संदर्भ में जल्द ही झारखंड के शिक्षामंत्री से बात करूंगा।

उत्कल सम्मेलनी के सचिव ड. राधानाथ प्रहराज ने कहा है कि ओडिआ भाषा को झारखंड में दूसरी राजभाषा की मान्यता मिली है यह सही, किन्तु भाषा को झारखंड में जिस प्रकार से सम्मान एवं सुविधा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल रही है। बंगाली एवं उर्दू भाषा को भी झारखंड में दूसरी राजभाषा की मान्यता मिली है। हालांकि इन भाषाओं को जिस प्रकार से महत्व मिल रहा है, उस हिसाब से ओडिआ भाषा को सम्मान नहीं मिल रहा है। ऐसे में झारखंड में रहने वाले ओडिआ लोग अब प्रतिवाद का स्वर उठा रहे हैं। ओडिआ भाषा एक समृद्ध भाषा है। इसे शास्त्रीय भाषा की मान्यता मिली हुई है। ऐसे में उस हिसाब से यदि देखा जाए तो झारखंड सरकार ओडिआ भाषा की अनदेखी नहीं कर सकती है।

ओडिशा प्रदेश गठन के समय तत्कालीन बिहार सरकार के साथ ओडिआ भाषा की सुरक्षा के लिए एक करारनामा हस्ताक्षरित हुआ था तथा वे झारखंड के (सड़ेइकला-खरसुआ) इलाके में रहने वाले ओडिआ भाषी लोगों के भाषा की सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्धता जताए थे। ओडिआ भाषा के स्कूलों में शिक्षक नियुक्त के साथ ही भाषा के प्रचार प्रसार की दिशा में आशानुरूप कदम अब झारखंड सरकार नहीं उठा रही है। ऐसे में ओडिआ भाषा को झारखंड सरकार को जिस हिसाब महत्व देना चाहिए, वह नहीं दे रही है, जिसके खिलाफ वहां के ओडिआ भाषी लोग अब आवाज उठा रहे हैं।

उत्कल सम्मेलनी के इस बयान के सामने आने बाद विरोधी दल नेता प्रदीप्त कुमार नायक ने आज मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को दो पन्ने वाला एक पत्र लिखा है। विरोधी दल के नेता ने झारखंड सरकार द्वारा ओडिआ भाषा की मान्यता को वापस लेने का आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है। झारखंड सरकार के इस निर्णय को विरोधी दल के नेता ने असंवैधानिक एवं अजनतांत्रिक बताया है।उन्होंने कहा है कि ओडिशा सरकार को इसका प्रतिवाद करना चाहिए। द्वितीय राजभाषा को वापस लेने का निर्णय प्रत्येक ओडिआ के लिए दुखद खबर है।

वहीं राज्य के शिक्षा मंत्री समीर रंजन दास ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि मैं झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री के साथ इस प्रसंग पर बात करूंगा। सीमावर्ती राज्यों में ओडिआ भाषा रहेगी जिससे कि ओडिआ बच्चे ओडिआ भाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए सरकार हर समय ठोस कदम उठाती रही है। झारखंड सरकार के साथ हमारा संपर्क अच्छा है। 150 ओडिआ स्कूल वहां पर चल रहे हैं ओड़िआ भाषा को झारखंड में महत्व दिया जाता रहा है। जरूरत पड़ेगी तो मैं इस प्रसंग पर अपने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करूंगा और झारखंड के मुख्यमंत्री के साथ भी चर्चा करूंगा।

यहां उल्लेखनीय है कि झारखंड प्रदेश की दुसरी राजभाषा की मान्यता सूची से ओडिआ भाषा को हटा दिए जाने को लेकर पिछले दो दिनों से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं इस तरह का कोई भी निर्देशनामा झारखंड सरकार द्वारा जारी नहीं किए जाने की बात उत्कल सम्मेलनी की तरफ से स्पष्ट की गई है।

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