Odisha: समुद्री तटों को तूफान और लहरों से बचाने की योजना तैयार

Odishaआधुनिक ज्ञान कौशल से बनाए जाने वाले मेनगृव जंगल 250 किलोमीटर तेज हवा और इसके प्रभाव से समुद्र में उठने वाली लहरों का सामना कर पाएंगे। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए प्रभावित छह स्थानों की पहचान कर ली है

Sachin Kumar MishraThu, 18 Nov 2021 06:31 PM (IST)
समुद्री तटों को तूफान और लहरों से बचाने की योजना तैयार। फाइल फोटो

भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। ओडिशा के समुद्री तट पर लगातार दस्तक दे रहे तूफान व लहरों के खतरों से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत समुद्री तट के वे इलाके जहां सबसे अधिक लहरों की मार पड़ती है, वहां मेनगृव जंगल खड़े किए जाएंगे। आधुनिक ज्ञान कौशल से बनाए जाने वाले मेनगृव जंगल 250 किलोमीटर तेज हवा और इसके प्रभाव से समुद्र में उठने वाली लहरों का सामना कर पाएंगे। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए प्रभावित छह स्थानों की पहचान कर ली है। कुल 198 किलोमीटर इलाके में यह जंगल खड़े किए जाएंगे। इसके लिए एक हजार 565 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है।

198 किलोमीटर तटबंध को मजबूत करने की योजना

पहले चरण में 198 किलोमीटर तटबंध को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए 765 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसकी विस्तृत रिपोर्ट जल संसाधन विभाग को सौंप दी गई है। आगामी तीन से चार महीने के भीतर मेनगृव जंगल से संबंधित जानकारी देने और डिजाइन प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल चक्रवात यास के दौरान राज्य के तटीय इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। समुद्री लहरों से तटीय इलाकों में बसे गांवों में लोगों को काफी नुकसान हुआ था। प्राकृतिक विविधता से पूर्ण चिलिका झील पर भी समुद्री तूफान का खतरा लगातार बना हुआ है। चिलिका झील पर भी फोकस किया जा रहा है।

गौरतलब है कि मई में ओडिशा में तबाही मचाने के बाद चक्रवात यास तटवर्ती इलाकों को पार कर गया था। तूफान की चपेट में आने से कई लोगों की मौत हो गई थी। जगह-जगह पेड़ गिरने से बालेश्वर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जगत सिंह पुर आदि जिले में बिजली सप्लाई ठप हो गई थी। तूफान के कारण हुई भारी बारिश व समुद्र में उठा ज्वार निचले इलाके में प्रवेश कर जाने से तटीय क्षेत्र के कई निचले इलाके जलमग्न हो गए थे। तूफान ने बालेश्वर से 20 किलोमीटर की दूरी पर लैंडफाल किया। फिर वहां से यह चक्रवाती तूफान उत्तर और उत्तर पश्चिम दिशा में गति करते हुए झारखंड में पहुंचा। तूफान के चलते 130 से 140 किलोमीटर के हिसाब से तेज हवा चली। भद्रक और बालेश्वर जिले में तूफान के चलते काफी नुकसान हुआ।

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