हौंसले के आगे बौना बन गया चुनौतियों का पहाड़

भुवनेश्वर, शेषनाथ राय। नेक इरादा, दृढ़ इच्छाशक्ति और खुद पर अगर विश्वास हो तो सफलता खुद ब खुद कदम चूमने लगती है। इसके जीते जागते उदाहरण हैं पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट डा. विजय कुमार साहू। जिनके दिल में गुरु-शिष्य परंपरा से ओतप्रोत सनातन मूल्यों वाले एक ऐसे स्कूल को स्थापित करने की इच्छा थी जिसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हो।

इन्होंने दिल की सुनी और अपने सपनों को साकार करने में जुट गए। इनकी राह में कई चुनौतियों ने पहाड़ बनकर रास्ता रोका, मगर हिम्मत नहीं हारी और अंतत: सपना साकार हो ही गया। आज राजधानी भुवनेश्वर के साईं इंटरनेशनल स्कूल को देश का 8वां सर्वश्रेष्ठ विद्यालय होने का गौरव प्राप्त है। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में डा. साहू ने अपनी पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि पढ़ाई खत्म करने के बाद मैंने अपना चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) करियर शुरू की। हालांकि मैं दिल से महसूस करता कि सीए मेरा प्रोफेशन तो है पर पैशन नहीं। बस यहीं से मेरे जीवन बदलाव आया। देश, समाज खासकर ओड़िशा के लिए कुछ करने गुजरने की ठान ली। जेहन में था कि कोई भी राज्य शिक्षा के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। इसलिए मैंने शिक्षा के लिए खुद को समर्पित कर लिया।

10 साल तक की कड़ी मेहनत 

उन्होंने बताया कि इसके लिए मैंने वर्ष 1997 से 2007 तक कड़ी मेहनत की। इस बीच राज्य सरकार से स्कूल स्थापना की स्वीकृति मिल गई। हमने यूके एवं सिंगापुर की स्कूलिंग का रिसर्च किया। तब इस नतीजे पर पहुंचा कि गुरु शिष्य परंपरा और वैल्यू बेस्ड एजूकेशन आज की पीढ़ी के लिए जरूरी है। इसके लिए विशेष शिक्षा प्रणाली तैयार की। तब जाकर साईं इंटरनेशनल स्कूल की नींव डाली और उसमें लागू किया। आज इस

स्कूल को देश के 10 सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में 8वां स्थान प्राप्त है। स्कूल में शिक्षा के साथ ही खेलकूद एवं व्यक्तित्व के विकास पर खासा महत्व दिया जाता है। स्कूल का सिद्धांत है माइंड एंड सोल डेवलपमेंट यानी सर्वांग शिक्षा। स्कूल का मोटो आलेस्टिक पैरेटिंग है। 

55 विदेशी स्कूलों के साथ करार 

डा. साहू ने कहा कि स्कूल के नाम में इंटरनेशनल शब्द जोड़ने के पीछे उद्देश्य था ओडिशा जैसे पिछड़े राज्य में पहला अंतरराष्ट्रीय स्कूल की स्थापना। इसके लिए हमने 55 विदेशी स्कूलों के साथ करार किया। इस स्कूल में विश्वस्तर की शिक्षा देने की व्यवस्था है। समय समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूलों से छात्रों

को यहां बुलाया जाता है। उनके साथ यहां के बच्चों को मिलाकार भावों का आदान प्रदान कराया जाता है, जो बच्चों के लिए काफी फायदेमंद होता है। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि कोई भी होनहार बच्चा पैसे के अभाव में शिक्षा से वंचित न रह जाए। आज स्कूल से निकलने वाले बच्चे देश-दुनिया में परचम लहरा रहे हैं और स्कूल का नाम रोशन कर रहे हैं।

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